Diwali Puja 20200 Puja Vidhi: दिवाली के दिन महालक्ष्मी की पूजा की जाती है. वहीं, इस दिन मा लक्ष्मी की पूजा करने के साथ श्रीयंत्र की भी पूजा करने का विधान है. लक्ष्मी जी के अलावा इस दिन गणेश जी और कुबेर भगवान की पूजा करनी भी बेहद शुभ होती है. आज के दिन लक्ष्मीजी की कृपा पाने के लिए श्रीयंत्र का सरल पूजन विधान है, जिसकी सहायता से साधारण व्यक्ति भी विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं. इस यंत्र को तांबे, चांदी और सोने किसी भी धातु पर बनाया जा सकता है.
ऐसी मान्यता है कि श्रीयंत्र, मां लक्ष्मी का प्रिय यंत्र है, इसीलिए इसकी पूजा करने से देवी लक्ष्मी जी प्रसन्न होती है. दिवाली के दिन घर में विधि-विधान के साथ श्रीयंत्र की पूजा और अराधना करने से घर में सुख-संपत्ति, सौभाग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. लेकिन इसकी स्थापना और पूजा करने के लिए कुछ बातों को मानना बेहद जरूरी है. मान्यता है कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और भक्तों के घर आती हैं. ऐसे में व्यक्ति को दिवाली के दिन अपने घर को साफ-सुथरा रखना चाहिए. साथ ही दिए भी जलाने चाहिए.
मां लक्ष्मी जी के साथ करें श्रीयंत्र की पूजा
मां लक्ष्मी के साथ-साथ दिवाली में श्री यंत्र की पूजा भी की जाती है. 2020 की दीपावली में गुरु धनु राशि में रहेगा. यही कारण है कि श्री यंत्र की पूजा कच्चे दूध से करने से सभी राशि के जातकों को लाभ होगा. इधर, शनि अपनी मकर राशि में विराजमान होंगे. साथ ही साथ इस दिन अमावस्या का भी योग बन रहा है. ऐसे में इस दौरान भी तंत्र-यंत्र की पूजा करनी चाहिए. इस यंत्र को तांबे, चांदी और सोने किसी भी धातु पर बनाया जा सकता है. ऐसी मान्यता है कि श्रीयंत्र, मां लक्ष्मी का प्रिय यंत्र है, इसीलिए इसकी पूजा करने से देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
इस दिन पूजा करते समय लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, शमी का पत्ता, कुमुकम, रोली, पान, गंगाजल, धनिया, गुड़, नारियल, चावल, इलायची, लौंग, कपूर, धूप, श्वेस वस्त्र, जनेऊ, चौकी, इत्र, सुपारी, मिट्टी, अगरबत्तियां, रूई, दीपक, कमल गट्टे का माला, दूध, बताशे, खील, कलावा, दही, शहद, कलश, चंदन, फूल, फल, गेहूं, जौ, दूर्वा, सिंदूर, चंदन, पंचामृत, मेवे, चांदी का सिक्का, बैठने के लिए आसन, हवन कुंड, हवन सामग्री, आम के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा हवन में बेल की लकड़ी, सूखे नारियल का गोला, बिना चीनी की खीर और सफेद तिल का इस्तेमाल करना चाहिए.
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त- शाम को 5 बजकर 30 मिनट से लेकर शाम के 7 बजकर 07 मिनट तक
निशीथ काल पूजा मुहूर्त- रात्रि 08 बजे से रात 10 बजकर 50 मिनट तक होगा.
अमृत मुहूर्त- 10 बजकर 30 मिनट पर, इसमें कनक धारा स्तोत्र का पाठ, श्री सूक्त का पाठ आदि कर सकते हैं.
महानिशीथ काल मुहूर्त- 08 बजकर अर्ध रात्रि के पश्चात 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.
महानिशीथ काल मुहूर्त में ज्यादातर तंत्र साधना की जाती है.
News posted by : Radheshyam kushwaha