बिहार में 2827 करोड़ खर्च कर बदले गये बिजली के जर्जर तार, डिस्ट्रीब्यूशन लॉस अब भी 15 फीसदी से अधिक

बिजली डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को घटाकर 15 फीसदी प्राप्त करने का लक्ष्य अब भी अधूरा है. इसे 31 मार्च, 2021 तक करीब 24 फीसदी रहने का अनुमान है.

By Prabhat Khabar News Desk | February 1, 2021 7:05 AM

पटना. राज्य में करीब 2827.51 करोड़ रुपये की लागत से करीब 71 हजार 672 सर्किट किमी खराब और बिजली के जर्जर तार 31 दिसंबर, 2019 को ही बदले जा चुके हैं. वहीं, बिजली डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को घटाकर 15 फीसदी प्राप्त करने का लक्ष्य अब भी अधूरा है. इसे 31 मार्च, 2021 तक करीब 24 फीसदी रहने का अनुमान है.

बिजली कंपनी ने 31 मार्च, 2022 तक इस डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को करीब 22 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. ऐसे में डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को कम करने के लिए बिजली चोरी रोकने सहित अन्य उपायों पर काम करने की जरूरत है.

सूत्रों का कहना है कि राज्य में बिजली का डिस्ट्रीब्यूशन लॉस बड़ी समस्या रही है. इसकी कई वजहों में से एक बड़ी वजह जर्जर और खराब बिजली के तारों को भी माना जा रहा था.

इन जर्जर तारों के कारण आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती थीं. इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश ने बिजली कंपनी को 31 दिसंबर, 2019 तक सभी जर्जर तारों को बदलने का लक्ष्य दिया था. बिजली कंपनी ने राज्य में सभी जर्जर तारों को बदल दिया.

27.89 फीसदी से घटकर 24 फीसदी डिस्ट्रीब्यूशन लॉस

बिजली कंपनी के अनुसार राज्य में बिजली डिस्ट्रीब्यूशन लॉस 2019-20 में 27.89 फीसदी था. यह 2020-21 में करीब 3.89 फीसदी घटकर 31 मार्च, 2021 तक करीब 24 फीसदी तक रहने की संभावना है.

जानकारों का कहना है कि अब जर्जर जार बदलने के बाद डिस्ट्रीब्यूशन लॉस कम करने के लिए इसके अन्य कारणों पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है. इसमें बिजली चोरी पर नियंत्रण पर एक प्रमुख कारण है.

जानकार बताते हैं कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद बिजली चोरी पर भी नियंत्रण की संभावना है. इससे डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को कम करने में मदद मिलेगी.

डिस्ट्रीब्यूशन लॉस कम होने का फायदा

जानकारों का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूशन लॉस कम होने से बिजली कंपनियों को आर्थिक रूप से फायदा होगा. इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा.

उपभोक्ताओं को कम टैरिफ दर में बिजली मिल सकेगी. साथ ही बिजली आपूर्ति को बेहतर तरीके से बहाल रखने में भी बिजली कंपनियों को मदद मिलेगी.

Posted by Ashish Jha

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