श्रद्धा : कल्पवासियों की भक्ति से गुलजार हुआ सिमरिया गंगा घाट, जारी है स्नान, ध्यान तप ,जोग व आरती

श्रद्धा : कल्पवासियों की भक्ति से गुलजार हुआ सिमरिया गंगा घाट, जारी है स्नान, ध्यान तप ,जोग व आरती तसवीर-17-गंगा किनारे अपने पर्णकुटीर में खाना बनाते कल्पवासीतसवीर20 -कल्पवासियों के गंगा भक्ति की चर्चा करते स्वामी चिदात्मन जी महाराजकल्पवासियों का जीवन यज्ञमय होता है : स्वामी चिदात्मनबेगूसराय (नगर). मिथिलांचल की पवित्र तीर्थनगरी में राजकीय कल्पवास मेले […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 31, 2015 6:36 PM

श्रद्धा : कल्पवासियों की भक्ति से गुलजार हुआ सिमरिया गंगा घाट, जारी है स्नान, ध्यान तप ,जोग व आरती तसवीर-17-गंगा किनारे अपने पर्णकुटीर में खाना बनाते कल्पवासीतसवीर20 -कल्पवासियों के गंगा भक्ति की चर्चा करते स्वामी चिदात्मन जी महाराजकल्पवासियों का जीवन यज्ञमय होता है : स्वामी चिदात्मनबेगूसराय (नगर). मिथिलांचल की पवित्र तीर्थनगरी में राजकीय कल्पवास मेले में कल्पवासियों की भक्ति से सिमरिया गंगा घाट गुलजार बना हुआ है. सिमरिया का पवित्र गंगा तट कल्पवासियों के दैनिक विधि-विधान से ओत-प्रोत है. कल -कल करती उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर कल्पवासी आनंदित हैं. उनके जीवन में बस विद्यापति की एक ही पंक्ति रह गयी है कि करब जप, तप, योग, धेयान, जनम कृतारथ एक ही सनान. हजारों की संख्या में वृद्ध महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में जाग कर नित्य क्रिया से निपट कर भजन करते हुए गंगा में डुबकी लगा कर अपने को धन्य मानती है. गंगा के किनारे बालू के ढेर पर कल्पवासियों की गंगा भक्ति सचमुच प्रेरणा का स्रोत है. स्नान के बाद कल्पवासी सूर्य को अर्घ देने के बाद विभिन्न देवी-देवताओं को अर्घ समर्पित करती हैं. कल्पवासी पितरों को पूजन करने के बाद कथा अमृत पान कर रही है. कार्तिक महात्मय श्रवण के बाद अन्न, दान और ज्ञान दान में जुट गयी हैं. कल्पवासियों के दैनिक जीवनयापन पर चर्चा करते हुए मां काली धाम, सिमरिया के प्रमुख स्वामी चिदात्मन जी महाराज कहते हैं कि कल्पवासियों का जीवन यज्ञमय होता है. जप, पाठ, हवन, अन्न दान, ज्ञान दान इनके कल्पवासीय जीवन के महत्वपूर्ण पहलू होते हैं. सिमरिया के गंगा तट पर एक माह से अधिक समय तक कल्पवास करनेवाले श्रद्धालुओं के शारीरिक पक्ष को उजागर करते हुए स्वामी चिदात्मन कहते हैं कि मानव के अंदर क्षिति, जल, पावक, गगन, समीर और सतोगुण, रजोगुण व तमोगुण से भरे-पूरे हैं. कल्पवास हमें शारीरिक स्वस्थता के साथ-साथ प्राकृतिक अनुकूलता, विशुद्ध ज्ञान की प्राप्ति, आहार की शुद्धि, व्यवहार, आचरण, विचार की शुद्धि देता है. बालू पर सोकर, पर्णकुटीर में रह कर और अरबा चावल का भोजन कर इंद्रियों का दमन करते हैं. कल्पवास हमें स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन, शांति और वाह्य सुख दे रहा है. स्वामी चिदात्मन कहते हैं कि कल्पवास हमारी पुरातन संस्कृति का हिस्सा है. आपसी सौहार्द, प्रेम और सर्वांगीण विकास के लिए कल्पवास है. गंगा नदी के तट पर हजारों वर्षों तक अनेक तपस्वियों ने तपस्या की है. इन पुनीत आत्माओं की तपस्या तथा श्रद्धा मां गंगा के जल को पवित्र ही नहीं आध्यात्मिक बल भी प्रदान करती है.