भागलपुर : कहलगांव प्रखंड कार्यालय के बैंक खाते बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक व सृजन में भी थे. इसे वर्ष 2010 में ही कहलगांव के बीडीओ ने बंद करा दिया था. सवाल यह उठ रहा है कि अगर सबकुछ मैनेज नहीं था, तो प्रखंड कार्यालय के तीन खाते एक साथ बंद करा दिये जाने के बावजूद किसी वरीय अधिकारियों ने संज्ञान क्यों नहीं लिया. बताया तो यहां तक जा रहा है कि तीनों खातों को जीरो बैलेंस करने के बाद बंद कराये गये थे. यह कैसा जीरो बैलेंस था कि सात साल बाद यह पता चला कि 13 करोड़ रुपये का उन खातों से फर्जीवाड़ा हुआ है. हालांकि, सृजन मामले की जांच सीबीआइ कर रही है. प्रबल संभावना है कि सीबीआइ को कहलगांव मामले की जांच में एक और मास्टरमाइंड मिल जाये.
वर्ष 2010 से अभी तक कहलगांव के छह बीडीओ बदल चुके हैं. सातवें बीडीओ के रूप में रज्जन लाल निगम 11.5.2015 से कार्यरत हैं. गत 21 सितंबर को कहलगांव के बीडीओ निगम ने 13 करोड़ के फर्जीवाड़े की प्राथमिकी कोतवाली थाने में दर्ज करायी थी. इसके बाद उन्होंने बताया था कि वर्ष 2010 में ही सृजन, बैंक ऑफ बड़ौदा व इंडियन बैंक के खाते तत्कालीन बीडीओ ने बंद करा दिये थे. उसके बाद से इन तीनों खातों से कोई लेन-देन नहीं हुआ है.
कहलगांव बीडीओ के पदनाम से बैंक ऑफ बड़ौदा की भागलपुर शाखा में बचत खाता (10010100009213) 12 अप्रैल, 2007 को खोला गया. बीडीओ द्वारा काटे गये चेक का भुगतान होता रहा. वह इसलिए कि जिस तिथि में चेक काटा गया, प्राय: उसी तिथि में सृजन के खाते से राशि ट्रांसफर कर दी जाती थी. प्रखंड विकास पदाधिकारी, कहलगांव के पदनाम से इंडियन बैंक, भागलपुर में 12 अप्रैल, 2007 को खाता (727901498) खोला गया था.
बैंक ऑफ बड़ौदा के सरकारी खाते में जमा नहीं हुई यह राशि
28 मार्च 2008 : 1,43,75000 रुपये
31 मार्च 2008 : 31,75000 रुपये
18 जुलाई 2008 : 1, 26, 24000 रुपये
01 जून 2009 : 2,35, 55000 रुपये
07 जनवरी 2009 : 76,30000 रुपये
कुल : सात करोड़ 73 लाख 59 हजार रुपये
इंडियन बैंक के सरकारी खाते में जमा नहीं हुए यह राशि
25 जनवरी 2010 : 16100000 रुपये
22 मई 2010 : एक करोड़ 63 लाख 41 हजार 700
कुल : तीन करोड़ 24 लाख 41 हजार 700 रुपये