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बढ़ती जा रही छात्राएं, नहीं बढ़े संस्थान

भागलपुर : सरकार की ओर से महिलाओं के बीच शिक्षा के प्रचार-प्रसार की कवायद करने की बात की जाती है, लेकिन महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कोई पहल होता नहीं दिख रहा है. कई दशक से भागलपुर में महिलाओं के लिए नये कॉलेज नहीं खुले हैं. यह स्थिति तब है, जब हर […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 12, 2014 3:22 AM

भागलपुर : सरकार की ओर से महिलाओं के बीच शिक्षा के प्रचार-प्रसार की कवायद करने की बात की जाती है, लेकिन महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कोई पहल होता नहीं दिख रहा है. कई दशक से भागलपुर में महिलाओं के लिए नये कॉलेज नहीं खुले हैं. यह स्थिति तब है, जब हर साल स्कूल से कॉलेज पहुंचनेवाली छात्राओं की संख्या में लगभग 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है.

1949 में खुला था एसएम कॉलेज : तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेज की बात करें, तो भागलपुर में एकमात्र एसएम कॉलेज है, जो केवल छात्राओं का संस्थान है. यह 1949 में स्थापित हुआ था. इसके बाद महिलाओं के लिए केवल एक संबद्ध कॉलेज शारदा झुनझुनवाला महिला महाविद्यालय खुला. उसके बाद महिलाओं के लिए भागलपुर में एक भी कॉलेज नहीं खुला.

महिला कॉलेज इसलिए भी जरूरी : बरारी के एक अभिभावक विजय कुमार बताते हैं कि आजकल जो हालात हो गये हैं, उसमें हर कोई हर पग पर बेटियों की सुरक्षा चाहता है. ऐसी स्थिति में अभिभावक ही नहीं, छात्राएं भी यही चाहती हैं कि उनका नामांकन किसी महिला कॉलेज में हो. इसमें सुरक्षा के मद्देनजर अभिभावक निश्चिंत होते हैं. उन्होंने बताया कि किसी भी स्कूली छात्र से अगर यह पूछा जाये कि वह भागलपुर के किस कॉलेज में नामांकन कराना चाहती है, तो उसका पहला जवाब एसएम कॉलेज ही मिलेगा. यह इस बात को साबित करता है कि छात्राएं भी महिला कॉलेज में ही पढ़ाई करना चाहती हैं.

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