…और जार-जार रोने लगीं एमएएम कॉलेजकर्मी
फोटो : सुरेंद्र 8वरीय संवाददाता भागलपुरतिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में मंगलवार को एमएएम कॉलेज, नवगछिया की पत्राचार लिपिक प्रेमनंदिनी कुमारी जार-जार रोने लगीं. वह इस तरह रोये जा रही थी कि वह किसी को अपनी समस्या बता भी नहीं पा रही थीं. बहुत समझाने के बाद महिला ने कहा कि वर्ष 2010 से उसे कॉलेज से […]
फोटो : सुरेंद्र 8वरीय संवाददाता भागलपुरतिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में मंगलवार को एमएएम कॉलेज, नवगछिया की पत्राचार लिपिक प्रेमनंदिनी कुमारी जार-जार रोने लगीं. वह इस तरह रोये जा रही थी कि वह किसी को अपनी समस्या बता भी नहीं पा रही थीं. बहुत समझाने के बाद महिला ने कहा कि वर्ष 2010 से उसे कॉलेज से वेतन नहीं मिला है. नवगछिया में किराये के कमरे में रहती हैं. जीवन-यापन करना मुश्किल हो गया है. कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुरोध करते-करते थक चुकी हैं, लेकिन किसी को तरस तक नहीं आती, जबकि उनकी नियुक्ति सृजित पद पर हुई है. उन्होंने बताया कि पूर्व में भी वर्ष 2006 से वेतन बंद कर दिया गया था. हाइकोर्ट से मुकदमा जीतने के बाद वर्ष 2009 में वेतन दिया. दोबारा वर्ष 2010 से वेतन बंद कर दिया गया. कहा जा रहा है कि सृजित पद पर उनकी नियुक्ति नहीं हुई है. महिला ने सवाल उठाया कि अगर सृजित पद पर नियुक्ति नहीं हुई होती, तो हाइकोर्ट से वेतन जारी करने का आदेश कैसे जारी हुआ और फिर वेतन भुगतान कैसे किया गया. उन्होंने बताया कि प्रतिकुलपति ने बुधवार को बुलाया है और समस्या का निदान करने का भरोसा दिलाया है.