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क्या डॉक्टर पर 302 का मुकदमा नहीं चलना चाहिए : पप्पू यादव

संवाददाता, भागलपुर सांसद पप्पू यादव ने कहा कि डॉक्टर की किसी से लड़ाई होती है, तो हॉस्टल से डॉक्टर निकल कर बाजार तक लड़ाई करने पहुंच जाते हैं. क्या भागलपुर के नौजवान कमजोर हैं. क्या जान बचानेवाला एक डॉक्टर हॉकी चला सकता है. अपने अहंकार के चलते हड़ताल कर तीन सौ-चार सौ बच्चों को मार […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 18, 2014 10:03 PM

संवाददाता, भागलपुर सांसद पप्पू यादव ने कहा कि डॉक्टर की किसी से लड़ाई होती है, तो हॉस्टल से डॉक्टर निकल कर बाजार तक लड़ाई करने पहुंच जाते हैं. क्या भागलपुर के नौजवान कमजोर हैं. क्या जान बचानेवाला एक डॉक्टर हॉकी चला सकता है. अपने अहंकार के चलते हड़ताल कर तीन सौ-चार सौ बच्चों को मार सकता है. क्या उन पर 302 का मुकदमा नहीं चलना चाहिए. क्या इसके लिए कानून नहीं है. सांसद ने कहा -आइएमए पर प्रतिबंध लगना चाहिए, ये डॉक्टर को जनता के खिलाफ भड़काता है. अगर सिम्मी पर माहौल बिगाड़ने का प्रतिबंध लग सकता है, तो आइएमए भी माहौल बिगाड़ता है. -मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का कहना है कि दिन भर में 16 मरीजों को देखना है. दवाई अल्फाबेटिकल में लिखना है. टूटी-फूटी अक्षरों में नहीं. एक मरीज को देखने में 45 मिनट समय लगाना है. मरीज को बताना है कि दो टेबलेट क्यों देंगे और क्या बीमारी है. यहां सौ मरीज देखते हैं. चार प्रतिशत आइसीयू ही सही है. 96 प्रतिशत आइसीयू गलत है. बिहार में तो आइसीयू खुलना ही नहीं चाहिए. उनके पास न तकनीक है न डॉक्टर. …और आंखें हो गयी नम आंदोलन का क्या मतलब है. आयो राम गयो राम. केवल फॉरमल्टिज करना है. निभाना नहीं है. हमने तो लोगों को जोड़ने का काम किया. विशाल तिवारी के भावना से जुड़े. उनके दर्द को महसूस किया. मैं पैर पकड़ता हूं और कहते-कहते उनकी आंखें नम हो गयी.

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