अंग-अंगिका ::: आधी आबादी के विकास से हौथो देश के विकास

-मनोरमा देवी, सचिव, सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौरभागलपुरदेश मे आधा-आधी आबादी महिला रो छय. महिला सिनी के जब तक आर्थिक रूप से निर्भर नै बनतै, तब तक समाज रौ विकास पूरा नाय होतै. सृजन ते महिला स होइ छय. हरेक महिला रो अंदर कुछ बनाबै रौ, सृजन रौ क्षमता हौई छय. सृजन रौ […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 23, 2015 11:05 PM

-मनोरमा देवी, सचिव, सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौरभागलपुरदेश मे आधा-आधी आबादी महिला रो छय. महिला सिनी के जब तक आर्थिक रूप से निर्भर नै बनतै, तब तक समाज रौ विकास पूरा नाय होतै. सृजन ते महिला स होइ छय. हरेक महिला रो अंदर कुछ बनाबै रौ, सृजन रौ क्षमता हौई छय. सृजन रौ उद्देश्य छय कि हरेक महिला सिनी रौ अधिक स अधिक क्षमता रौ इस्तेमाल करौ, ताकि विकासों में पुरुषों रौ कंधा में कंधा मिला कै चलै सकै. महिला सिनी घर मे मसाला, पापड़, अचार बनाय छय. एकरो बावजूद सही मायने मे हय सिनी रौ उपयोग नाय हुए पारै छय. महिला सिनी अपना बास्ते त बनावै छय. साथे साथ परिवारौं बास्ते भी बनवै छै. इहै रंग सिलाय, कटाय, बुनाय-कढ़ाइ भी परिवारौं बास्ते करै छय. हय सिनी काम भी आत्म निर्भर बनय बास्ते काफी छय. इहै सिनी कामों के यदि व्यवसाय बनाय लेतै त अपनों परिवार चलालै आरू अपनो जिंदगी गुजारै में कोय दिक्कत नाय होते. सबै स पहले एक महिला शुरू करतै, तब देखादेखी दूसरो, तेसरो महिला सिनी ने शुरू करी दैते. तबै त आत्मनिर्भरता लानैं में कै रोकतय. धीरे-धीरे इ आंदोलन रौ रूप में समाजों आगु बढ़ी जैते. सरकारों सिनी कर महिला बास्ते समय-समय पर विशेष प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाना चाहियो. महिला के विकास से ही देश व समाज के सही मायने में विकास हौते. त महिला का आगु आना चाहियौ आरू विकास के साथ आत्मनिर्भर बनना चाहियौ.

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