राहत शिविर में राहत नहीं, केवल तकलीफ

भागलपुर : सबौर चौक से पश्चिम में थाेड़ी ही दूर पर हाइस्कूल है. यहां बाढ़ पीड़ित शरण लिये हुए हैं. इस राहत शिविर में उन्हें राहत नहीं, तकलीफ मिल रही है. इस वास्तविकता काे बाढ़ पीड़ित परिवार ने बताया और बताने के साथ उसका दर्द आंखों से छलक आया. दरअसल, पिछले पांच दिनों से वे […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 24, 2016 5:25 AM

भागलपुर : सबौर चौक से पश्चिम में थाेड़ी ही दूर पर हाइस्कूल है. यहां बाढ़ पीड़ित शरण लिये हुए हैं. इस राहत शिविर में उन्हें राहत नहीं, तकलीफ मिल रही है. इस वास्तविकता काे बाढ़ पीड़ित परिवार ने बताया और बताने के साथ उसका दर्द आंखों से छलक आया.

दरअसल, पिछले पांच दिनों से वे घर-द्वार और सामान छोड़ कर राहत शिविर में रह रहे हैं. मगर, मंगलवार को पहली बार उन्हें खिचड़ी मिली, वह भी आधा पेट. नमक-पानी पीकर अधिकतर पीड़ित परिवार ने अपना पेट भरने की कोशिश की. स्कूल के एक हिस्से में रजंदीपुर के लगभग एक हजार, तो दूसरे में शंकरपुर के लगभग 500 लोगों ने शरण ली है. अधिकतर पीड़ित परिवार को नमक पानी और पहले ही घर से साथ लेकर चले सत्तू में से जो थोड़ा बहुत बचा था, उससे अपनी भूख मिटायी. कजली देवी को जब खिचड़ी नसीब नहीं हुई, तो उसने सत्तू का घोल बना कर पीया और बच्चों को भी पिलाया.

पेट नहीं भरने पर जब बच्चे तंग करने लगे, वह उनको समझा रही थी कि बेटा सत्तू ओराय गेलै, पानी पिबि ले. खिचड़ी वाला आबी रहिलो छै, तअ लै खाय लअ देबौ. वही दो मंजिले स्कूल के एक कमरे में भूखे-प्यासे एक दर्जन से अधिक पीड़ित परिवार इस उम्मीद के साथ बैठे थे कि खिचड़ी आयेगी, तो उन्हें भी मिलेगा और भूख मिटेगी. इधर,

पांच दिन बाद बना शौचालय, मगर चालू नहीं : पांच दिन बाद मंगलवार को बाढ़ पीड़ितों के लिए शौचालय की व्यवस्था हुई. वह भी चालू नहीं हो सका है. इससे पहले बाबूपुर मोड़ के पास शौचालय बनाया गया, जो बाढ़ में डूब चुका है. बाढ़ पीड़ित सीताराम, महेश आदि ने केनरा बैंक के समीप अतिक्रमण मुक्त जगहों पर शौचालय बनाने की मांग की है. बीडीओ ने बाढ़ पीड़ितों से दो टूक जवाब दिया कि शौचालय चाहिए, तो उन्हें पीएचइडी अधिकारी से मिलना होगा.

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