अनशन पर बैठीं छात्राएं, किया विरोध, तो मिले पांच शिक्षक

साइंस, अंगरेजी सोशल साइंस आदि विषयों में नहीं थे शिक्षकप्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरीSpies In Mauryan Dynasty : मौर्य काल से ही चल रही है ‘रेकी’ की परंपरा, आज हो तो देश में मच जाता है बवालRajiv Gauba : पटना के सरकारी स्कूल से राजीव गौबा ने की थी पढ़ाई अब बने नीति आयोग के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 31, 2016 5:25 AM

साइंस, अंगरेजी सोशल साइंस आदि विषयों में नहीं थे शिक्षक

सूचना मिलने पर डीइआे मौके पर पहुंचे, शिक्षकों की करायी व्यवस्था
भागलपुर : खिरनीघाट डायट परिसर स्थित ओबीसी प्लस टू की छात्राएं शिक्षकों की कमी को लेकर मंगलवार को अनशन पर बैठ गयी. करीब दो घंटे तक छात्रावास में छात्राएं अनशन पर बैठी रही. छात्राओं ने स्कूल प्रशासन के विरोध में नारेबाजी भी की. छात्राओं का आराेप था कि शिक्षक की कमी को दूर करने के लिए स्कूल प्रशासन को बार-बार कहा गया. लेकिन उनकी
बातों की अनदेखी की गयी. विद्यालय में साइंस, अंगरेजी, सोशल साइंस, संस्कृत आदि विषयों के शिक्षक नहीं है. सूचना मिलने पर डीइओ फूलबाबू चौधरी विद्यालय पहुंचे. अनशन कर रही छात्राओं को समझा-बुझा कर डीइओ ने अनशन तोड़वाया. छात्राओं को भरोसा दिलाया कि स्कूल में पांच शिक्षकों की व्यवस्था अविलंब करायी जायेगी.
डायट परिसर स्थित ओबीसी प्लस टू स्कूल का मामला
अविलंब पांच विषयों के लिए शिक्षकों की व्यवस्था की गयी है. दो दिनों के अंदर अन्य विषयों के लिए भी शिक्षकों की व्यवस्था कर दी जायेगी. छात्राओं की समस्या को लेकर स्कूल प्रशासन को विशेष हिदायत दी गयी है. बेहतर पठन-पाठन को लेकर निर्देश भी दिये गये हैं. पेयजल आदि व्यवस्था कराने के लिए स्थानीय विधायक से अनुरोध किया जायेगा.
फूलबाबू चौधरी, डीइओ, भागलपुर
कक्षा नौ से 12वीं तक शिक्षक नहीं
छात्राओं ने बताया कि विद्यालय में एक मात्र गणित के शिक्षक हैं. बाकी विषयों के शिक्षक नहीं हैं. इससे उनलोगों की पढ़ाई बाधित हो रही है. कक्षा नौ से लेकर 12वीं तक में शिक्षक नहीं हैं. कक्षा कभी होती है, ताे कभी नहीं होती है. सिर पर परीक्षा है. लेकिन पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही है. ऐसे में रिजल्ट खराब हो सकता है. छात्राओं ने बताया कि छात्रावास में पेयजल की व्यवस्था ठीक नहीं है. बिजली रहने पर पानी मिलता है. बिजली के नहीं रहने के कारण टंकी में जमा खराब पानी पीना पड़ता है. जेनेरेटर की सुविधा नहीं होने पर अंधेरे में रहने पड़ता है. खिड़की के शीशे टूटे हुए हैं. छात्रावास की हालत जर्जर है. लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं है.

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