मरीजों को एक्सरे के लिए डॉक्टर भेज रहे निजी सेंटर, मिलता है मोटा कमीशन
मरीजों को एक्सरे के लिए डॉक्टर भेज रहे निजी सेंटर, मिलता है मोटा कमीशन
फ्लैग- मायागंज अस्पताल के ओपीडी में इलाज के लिए आये मरीजों को रोजाना लग रहा हजारों का चूना
– ओपीडी के डाॅक्टर लिखते हैं 300 से अधिक मरीजों को एक्स-रे, अस्पताल की क्षमता रोजाना 125 एक्स-रे की हीवरीय संवाददाता, भागलपुर
दूर-दराज वाले मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा रहे : मायागंज अस्पताल के चिट्ठे पर निजी एक्स-रे सेंटर जांच करा कर लौट रहे सनोखर थाना के नया टोला निवासी तिलेश्वर तांती ने बताया कि उनकी मां पार्वती देवी का हाथ टूट गया है. डॉक्टर ने कहा कि बाहर से एक्स-रे जांच कराओ. जांच के लिए 350 रुपये दिये. तिलेश्वर ने एक्स-रे प्लेट दिखाते हुए कहा कि इसके लिफाफे पर किसी सेंटर का नाम नहीं है. जबकि एक्सरे फिल्म पर उषा डिजिटल एक्स-रे एंड रिसर्च सेंटर भागलपुर अंकित था. वहीं धोरैया की मरीज तारा देवी के परिजन ने बताया कि मरीज को चलने में दिक्कत हो रही है. मायागंज अस्पताल के ओपीडी में दिखाने पर डॉक्टर ने कहा कि बाहर जाकर एक्स-रे करा लाएं. तब पता चलेगा कि कमर में कोई परेशानी है या नहीं. तारा देवी ने बताया कि ओपीडी के सरकारी एक्स-रे सेंटर पर कहा गया कि बुधवार को जांच होगी, कल आइयेगा. फिर से धोरैया से भागलपुर आने जाने में काफी खर्च हो जाता है. इसलिए मजबूरीवश हमें बाहरी सेंटर पर जांच कराना पड़ा. इधर, नवगछिया के परबत्ता निवासी अशोक मंडल भी निजी सेंटर पर एक्सरे कराने पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि छाती की हड्डी में दर्द है. डॉक्टर ने बाहर एक्स-रे कराने भेजा है.
मायागंज अस्पताल में सवा सौ मरीजों का ही होता है एक्स-रे : मायागंज अस्पताल के ओपीडी में संचालित एक्स-रे सेंटर के बाहर मंगलवार को जांच कराने के लिए मरीजों की काफी भीड़ नजर आयी. कई मरीज अपनी बारी के इंतजार में जमीन पर लेटे नजर आये. एक्स-रे सेंटर से जानकारी मिली कि एक्स-रे मशीन की क्षमता कम है. एक दिन में 100 से 125 मरीजों की ही जांच हो सकती है. शेष मरीजों को दूसरे दिन जांच के लिए बुलाया जाता है. जबकि ओपीडी के डॉक्टर 300 से अधिक मरीजों को एक्सरे कराने की सलाह देते हैं. ऐसे में दूर-दराज से आये मरीज दूसरे दिन आने के झंझट से बचने के लिए निजी सेंटर पर जांच कराने चले जाते हैं.
कोट…
मायागंज अस्पताल के मरीजों को एक्स-रे के लिए बाहर नहीं भेजा जाता है. भीड़ के कारण उन्हें दूसरे दिन बुलाया जाता है. मैं खुद मामले की पड़ताल करुंगा. अगर जांच में किसी मरीज को डॉक्टर द्वारा बाहर जांच के लिए भेजने का साक्ष्य मिलता है तो कड़ी कार्रवाई की जायेगी.-डॉ राकेश कुमार, अधीक्षक, जेएलएनएमसीएच
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