भागलपुर में चौंकाने वाली खोज, सैंडिस कंपाउंड के जिस पत्थर पर लोग बैठते थे वह निकला दुर्लभ ट्री फॉसिल

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फासिल्स के पास बैठे जिला काम संस्कृति पदाधिकारी.

फासिल्स के पास बैठे जिला काम संस्कृति पदाधिकारी.

भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में सैकड़ों लोग जिस आम पत्थर पर बैठते थे, वह असल में हजारों साल पुराना वृक्ष जीवाश्म निकला है. इस ऐतिहासिक खोज को अब भागलपुर संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा.

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भागलपुर से संजीव झा की रिपोर्ट

Bhagalpur News: भागलपुर के ऐतिहासिक सैंडिस कंपाउंड में हर दिन सैकड़ों लोग मॉर्निंग वॉक करने आते हैं. कोई यहां टहलता है, कोई योग करता है और कई लोग एक बड़े पत्थर जैसी दिखने वाली आकृति पर बैठकर आराम भी कर लेते हैं. लेकिन किसी ने शायद ही कभी सोचा होगा कि जिस चीज को साधारण पत्थर समझा जा रहा है, वह धरती के हजारों साल पुराने इतिहास का हिस्सा हो सकती है.

अब यही 'पत्थर' भागलपुर के लिए बड़ी वैज्ञानिक और ऐतिहासिक खोज बन गया है. विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में इसे ट्री फॉसिल (वृक्ष जीवाश्म) माना गया है. जिला प्रशासन ने इसे संरक्षित करने की अनुमति दे दी है और जल्द ही इसे भागलपुर संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा, जहां इसका वैज्ञानिक परीक्षण होगा.

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मॉर्निंग वॉक के दौरान पड़ी नजर, फिर खुला इतिहास का नया पन्ना

सोमवार सुबह जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन सैंडिस कंपाउंड में मॉर्निंग वॉक कर रहे थे. इसी दौरान उनकी नजर उन पत्थर जैसी आकृतियों पर गई, जिन्हें लोग वर्षों से सामान्य चट्टान समझते रहे थे.

करीब से देखने पर उन्हें शक हुआ कि ये सामान्य पत्थर नहीं हैं. उन्होंने तुरंत मामले को गंभीरता से लिया और इसके संरक्षण की पहल शुरू की. जांच में यह भी सामने आया कि परिसर में ऐसे एक नहीं, बल्कि कई संभावित ट्री फॉसिल बिखरे पड़े हैं.

डीएम ने दी मंजूरी, अब भागलपुर संग्रहालय में होगा संरक्षण

इस खोज की जानकारी मिलते ही बिहार के संग्रहालय एवं पुरातत्व निदेशालय के निदेशक कृष्ण कुमार और भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने मामले का संज्ञान लिया.

जिलाधिकारी ने इन जीवाश्मों को संरक्षित करने की अनुमति दे दी है. अब इन्हें भागलपुर संग्रहालय में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां वैज्ञानिक तरीके से इनकी जांच और संरक्षण किया जाएगा. इससे यह बहुमूल्य धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सकेगी.

विशेषज्ञों ने कहा- यह हजारों वर्ष पुराना ट्री फॉसिल हो सकता है

खोज की पुष्टि के लिए इन आकृतियों की तस्वीरें तुरंत पटना विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के अध्यक्ष और जीवाश्म विशेषज्ञ डॉ. अतुल आदित्य पांडेय को भेजी गईं.

प्राथमिक अध्ययन के बाद उन्होंने इन आकृतियों को स्पष्ट रूप से ट्री फॉसिल माना है. उनके अनुसार ये जीवाश्म हजारों वर्ष पुराने हो सकते हैं. हालांकि इसकी सटीक आयु और वैज्ञानिक पहचान विस्तृत परीक्षण के बाद ही सामने आएगी.

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Bhagalpur News: वैज्ञानिक जांच से खुलेंगे कई अहम रहस्य

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये जीवाश्म आखिर किस दौर के हैं. वैज्ञानिक परीक्षण के बाद यह पता लगाया जाएगा कि यह किस प्रजाति के प्राचीन वृक्ष का जीवाश्म है.

कार्बन डेटिंग और अन्य वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए इसकी वास्तविक उम्र का भी निर्धारण किया जाएगा. साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि यह जीवाश्म किस भूवैज्ञानिक कालखंड से जुड़ा हुआ है. यह जानकारी भागलपुर ही नहीं, बल्कि बिहार के प्राकृतिक इतिहास और भूवैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

भागलपुर के इतिहास और शोध को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक संरक्षण के बाद जब इन जीवाश्मों को भागलपुर संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा, तब विद्यार्थी, शोधार्थी और आम लोग भी इन्हें करीब से देख सकेंगे.

यह खोज सिर्फ एक जीवाश्म मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी संदेश देती है कि कई बार हमारी अनदेखी के बीच इतिहास और प्रकृति की अनमोल धरोहर हमारे आसपास ही मौजूद होती है. जरूरत सिर्फ उसे पहचानने वाली एक सजग नजर की होती है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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