मान और रूप से नहीं करें अहंकार
आरा : धन, मान, ज्ञान, बल और सुंदरता पाकर अहंकार नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने कर्तव्य का फल और ईश्वर की कृपा मान कर उसके प्रति नृलिप्त रहना चाहिए. अन्याय और अत्याचार से फलने-फूलने वाला व्यक्ति अधिक दिनों तक शांति से नहीं रह सकता. उपरोक्त बातें श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी ने चंदवा चातुर्मास ज्ञान […]
आरा : धन, मान, ज्ञान, बल और सुंदरता पाकर अहंकार नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने कर्तव्य का फल और ईश्वर की कृपा मान कर उसके प्रति नृलिप्त रहना चाहिए. अन्याय और अत्याचार से फलने-फूलने वाला व्यक्ति अधिक दिनों तक शांति से नहीं रह सकता. उपरोक्त बातें श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी ने चंदवा चातुर्मास ज्ञान यज्ञ में प्रवचन करते हुए कही. श्री जीयर स्वामी ने कहा कि धन-वैभव, मान-सम्मान और सत्ता सुख प्राप्ति के बावजूद लिप्सा नहीं रखने वाला व्यक्ति ही महापुरुष कहलाता है.
सांसारिक उपलब्धियों से आशक्ति और अहंकार अंतत: विनाश का कारण बनता है. जो भी साधन-शक्ति प्राप्त हो, उसे ईश्वर की कृपा मान कर समाज के प्रति अपना दायित्व निर्वहन करना चाहिए. साधना के धनी के पास झुक जाते हैं साधन के धनी. इसलिए किसी भी क्षेत्र में साधन की अपेक्षा साधना पर ध्यान केंद्रित करनी चाहिए. स्वामी जी ने कहा कि महाभारत के कुछ दिनों उपरांत युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर का उत्तराधिकारी अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को बना दिया.
