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आंधी-पानी से रबी फसल को हुआ भारी नुकसान

प्रकृति का कहर किसानों पर बदस्तूर जारी है. एक सप्ताह से लगातार बिना मौसम बारिश और आंधी तथा ओलावृष्टि होने से रबी की फसल को भारी नुकसान हुआ है. बेमौसम बारिश ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है. बिना मौसम बरसात की रबी फसल पूरी तरह बरबाद हो चुकी है. किसान फसल बरबाद […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 15, 2015 7:23 AM
प्रकृति का कहर किसानों पर बदस्तूर जारी है. एक सप्ताह से लगातार बिना मौसम बारिश और आंधी तथा ओलावृष्टि होने से रबी की फसल को भारी नुकसान हुआ है. बेमौसम बारिश ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है. बिना मौसम बरसात की रबी फसल पूरी तरह बरबाद हो चुकी है. किसान फसल बरबाद होने के बाद काफी चिंतित दिख रहे हैं.
आरा : एक सप्ताह से जारी बीन मौसम बरसात ने किसानों की कमर तोड़ दी है. प्रतिदिन कहीं-न-कहीं जिले में हो रही बारिश से खेत में खड़ी रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है. वहीं आम के मौजर भी पूरी तरह बरबाद हो चुके हैं.
सोमवार को देर शाम आंधी व बारिश से जिले में रबी फसलों को भारी क्षति हुई है. मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ पीके द्विवेदी की मानें, तो आनेवाले कुछ दिनों में ऐसा ही मौसम बने रहने की उम्मीद है. वहीं देर शाम आयी आंधी व बारिश से कई जगहों पर पेड़ धरासाई हो गया. वहीं तारों के टूटने के वजह से विद्युत आपूर्ति भी कई जगहों पर ठप पड़ी हुई है. मंगलवार को भी पूरे दिन आकाश में बादल छाये रहे.
वहीं कई जगहों पर हल्की बूंदाबांदी भी हुई. बेमौसम हो रही बारिश से किसान काफी चिंतित है. अब उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर क्या किया जाये. कई किसानों के फसलें जहां खेतों में लगी है. वहीं कई किसानों के फसलें खलिहान में रखी हुई है, जो बारिश से भींग कर पूरी तरह बरबाद हो रही है.
कुछ इसी तरह रहेगा मौसम : फिलहाल किसानों को इस मौसम से निजात मिलता नहीं दिख रहा है.कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ पीके द्विवेदी ने बताया कि विश्व व्यापी जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह का मौसम बना हुआ है. उन्होंने कहा कि जिन किसानों के फसले खेत में लगी हुई वो किसी तरह काट ले. क्योंकि अभी कुछ दिनों तक मौसम का इसी तरह मिजाज बना रहेगा.
इस मौसम में भी करें खेती
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की मानें, तो इस मौसम में भी किसान कम समयवाली फसलों को उगा कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं. वैज्ञानिकों ने बताया कि ऐसे मौसम में लोग कम समय में होनेवाली फसल मूली, साग की खेती कर क्षतिपूर्ति को कम कर सकते हैं.

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