आरा : गरीबी के बीच कुंती ने अपने बेटी, नूतन को अंतरराष्ट्रीय वुशू खिलाड़ी बनाया. दृढ़इच्छा शक्ति के आगे कुंती ने गरीबी को कभी आड़े आने नहीं दिया और नूतन को प्रेरणा देते आज अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बना दिया. नूतन ने बताया कि जो मंै आज हूं सिर्फ अपनी मां की बदौलत हूं.
उसने बताया कि जब मैं आठवीं कक्षा में थी, तब ट्रेनिंग के लिए जा रही थी, जहां हमें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. इसके बाद मंैने प्रशिक्षण छोड़ दिया लेकिन मां ने हार नहीं माना और मेरे अंदर प्रेरणा जगा कर ट्रेनिंग करने के लिए फिर भेजा.
इसका नतीजा है कि आज मेरी पहचान देश दुनिया में बन गयी. उसने बताया कि मां ने कभी भी गरीबी का एहसास हमलोगों को नहीं होने दिया. जब भी जो चाहिए किसी तरह उसकी व्यवस्था कर देती थी, आज जो भी मंै हूं सिर्फ मां की बदलौत हूं. वे हमेशा से हमारे लिए प्रेरणास्नेत हैं. मां के ही आंचल में आज मेरी सारी दुनिया है.