छपरा (सदर) : गत विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए तथा महागठबंधन के घटक दलों के बीच बदलते समीकरण के बीच सभी 10 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न दलों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तैयारियां की गयी है. वहीं इन दोनों प्रमुख घटक दलों में गत विधानसभा चुनाव में साथ लड़ने वाले एक साथ लड़ने वाले उम्मीदवार एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं जिसका ताजा उदाहरण परसा तथा एकमा विधानसभा क्षेत्र है. गत चुनाव में जो उम्मीदवार एक दूसरे के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे थे. वहीं अब बदलते समीकरण में महांगठबंधन छोड़कर एनडीए में आये या एनडीए छोड़कर महागठबंधन में गये उम्मीदवार एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं. 2015 में महागठबंधन के टिकट से चुनाव जीतने वाले एकमा के विधायक मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह इस बार एनडीए के साथ हैं. जबकि परसा से राजद के सीट पर जीत दर्ज कराने वाले लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय ने एनडीए के बैनर तले चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. वहीं गत बार परसा से लोजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने व पराजित होने वाले छोटे लाल राय इस बार राजद में शामिल होकर महागठबंधन से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं.
धर्म क्षेत्र हरिहरनाथ मंदिर तथा अंबिका भवानी मंदिर को अपने में समेटे सोनपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता इस बार फिर एनडीए तथा महागठबंधन के उम्मीदवारों को चुनने के लिए अपने-अपने स्तर से मन बनाये हुए हैं. गत विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में जदयू नेता नीतीश तथा राजद नेता लालू यादव के साथ होने की वजह से राजद उम्मीदवार के रूप में डॉ रामानुज प्रसाद विजयी हुए थे. जबकि भाजपा उम्मीदवार व पूर्व एमएलए विनय कुमार सिंह को पराजय की मुंह देखनी पड़ी थी.
सबसे ज्यादा बुद्धिजीवियों एवं मतदाताओं वाले छपरा विधानसभा क्षेत्र में गत विधानसभा चुनाव 2015 में भाजपा के उम्मीदवार डॉ सीएन गुप्ता विजयी हुए थे. उस चुनाव में महागठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ने वाले पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के पुत्र व पूर्व एमएलए रंधीर कुमार सिंह अपनी सीट बचाने में सफल नहीं हो सके थे. महागठबंधन की ताकत के बावजूद शहरी मतदाताओं ने भाजपा उम्मीदवार को पसंद किया था.
सारण जिले में अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए आरक्षित सीट गड़खा विधानसभा में गत बार मुख्य लड़ाई महागठबंधन के राजद उम्मीदवार मुनेश्वर चौधरी तथा भाजपा के उम्मीदवार ज्ञानचंद मांझी के बीच हुई थी. परंतु, जदयू के महागठबंधन के साथ होने के कारण काफी मजबूत ढ़ंग से पूर्व मंत्री मुनेश्वर चौधरी ने अपनी जीत दर्ज करायी. जबकि ज्ञानचंद मांझी को हार का सामना करना पड़ा. इस बार भी बदले समीकरण में एनडीए की तरफ से उम्मीदवारों को लेकर कई नेता दावेदारी कर रहे हैं.
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे दारोगा प्रसाद राय की कर्मभूमि व गंडक नदी के किनारे मुजफ्फरपुर सीमा पर अवस्थित परसा विधानसभा क्षेत्र में गत विधानसभा चुनाव में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव व राबड़ी देवी के समधि चंद्रिका राय ने जीत हासिल की थी. उन्होंने एनडीए गठबंधन के लोजपा प्रत्यासी व पूर्व एमएलए छोटे लाल राय को पराजित किया था. इस बार ये दोनों ने अपना पासा बदला है. चंद्रिका राय जहां एनडीए में आ गये हैं, वहीं छोटेलाल राय महागठबंधन में शामिल होकर अपने टिकट पक्की करने में लगे हैं.
पूर्व में नक्सल प्रभावित व पूर्व केंद्रीय मंत्री व स्थानीय सांसद राजीव प्रताप रूडी के गृह प्रखंड अमनौर विधानसभा क्षेत्र से गत चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में शत्रुघ्न तिवारी उर्फ चोकर बाबा ने महागठबंधन के उम्मीदवार व पूर्व एमएलए कृष्ण कुमार सिंह उर्फ मंटू को पराजित किया. इस चुनाव में तीसरे स्थान पर राजद के वर्तमान जिलाध्यक्ष सुनील राय जो गत विधानसभा चुनाव में अमनौर से निर्दलीय प्रत्यासी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे तीसरे स्थान पर रहे. इस बार महागठबंधन तथा एनडीए से चुनाव लड़ने वाले शत्रुधन तिवारी उर्फ चोकर तथा कृष्ण कुमार सिंह मंटू का एक ही गठबंधन में होने के कारण टीकट को लेकर चर्चा हो रही है.
posted by ashihs jha