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बिहार में ठंड के दौरान हार्ट अटैक के मामले बढ़े, पटना के अस्पतालों में करीब 500 मरीज भर्ती, जानिए बचाव के उपाय

बिहार में ठंड के दौरान हार्ट अटैक के मामले बढ़ गए हैं. पटना के अस्पतालों में करीब 500 मरीज भर्ती हो गए हैं. ये मरीज बिहार के अलग-अलग जिलों से रेफर किए गए हैं. जानिए क्या है ठंड को लेकर डॉक्टरों की सलाह और क्या है बचाव के उपाय..

Bihar Weather Impact: बिहार में ठंड का प्रकोप इन दिनों बढ़ा हुआ है. सर्दियों का मौसम कई लोगों को पसंद होता है. लोग इस मौसम का जबरदस्त आनंद उठाते हैं. लेकिन, जरूरी नहीं कि आपके दिल को भी यह मौसम सुहाना लगे. सर्दियों के मौसम में दिल की सेहत बिगड़ने का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसमें हार्ट अटैक और हाइपरटेंशन भी शामिल है. पटना के इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान, पीएमसीएच और आइजीआइएमएस में बीते 24 दिन यानी एक जनवरी से 24 जनवरी तक 478 मरीज हार्ट अटैक के भर्ती हुए हैं.

करीब 500 मरीज अस्पतालों में भर्ती..

पटना के अस्पतालों में भर्ती सभी मरीज प्रदेश के अलग-अलग जिलों से रेफर होकर पहुंचे हैं. इनमें सबसे अधिक मरीज हृदय रोग संस्थान में 204, पीएमसीएच में 127 और आइजीआइएमएस में 147 मरीज भर्ती किये गये हैं. इन तीनों अस्पतालों में रोजाना 20 से 25 मरीज हार्ट अटैक के पहुंच रहे हैं. जबकि इससे पूर्व यह संख्या अधिकतम 10 से 12 के बीच थी. वहीं इन तीनों अस्पतालों को मिलाकर ब्रेन डेड यानी पहले से ही मृत लोगों के 16 केस आये हैं. इनमें ब्रेन हैमरेज, सड़क दुर्घटना आदि अलग-अलग कारणों के मरीज शामिल हैं.

IGIMS के हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष की सलाह..

आइजीआइएमएस हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ रविविष्णु ने कहा कि ठंड से हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या में दोगुने का इजाफा हुआ है. इन दिनों वार्ड पूरी तरह से फुल हैं. उन्होंने कहा कि ब्लड क्लॉटिंग होने के कारण हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. रात एक से सुबह 5 बजे तक सबसे अधिक हार्ट अटैक का खतरा होता है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है.

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हार्ट अटैक के ये हैं लक्षण…

आइजीआइसी के डॉ अमिताभ कुमार का कहना है कि धड़कन तेज होने, अचानक बीपी बढ़ने या कम होने, जबड़े में दर्द, बायें हाथ या सीने में बायीं ओर कमर में अचानक तेज दर्द को नजरअंदाज न करें. घबराहट, सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराएं.

बचना है तो ये करें…

डॉ अमिताभ ने बताया कि अगर हार्ट अटैक से बचना है, तो सुबह व रात में गुनगुना पानी पीएं. साथ ही सुबह झटके से सोकर न उठें, सुबह दौड़ने से पहले कुछ देर पैदल जरूर चलें. जिम में व्यायाम करने से पहले कुछ देर तक वार्मअप जरूर करें. तापमान का संतुलन बना कर रखें.

शीत-घात: बचाव से लिए क्या करें और क्या न करें

शीत-घात से पहले

  • आपातकालीन आपूर्ति जैसे भोजन, पानी, इंधन, बैटरी, चार्जर, आपातकालीन प्रकाश, और साधारण दवाएं तैयार रखें.

  • घर में ठंडी हवा के प्रवेश रोकने के लिए दरवाजों तथा खिड़कियों को ठीक से बंद रखें.

शीत-घात के दौरान

  • मौसम की जानकारी तथा आपातकालीन प्रक्रिया की जानकारी का बारीकी से पालन करें एवं शासकीय एजेंसियों की सलाह के अनुसार कार्य करें.

  • जितना हो सके घर के अंदर रहें और ठंडी हवा, बारिश, बर्फ के संपर्क को रोकने के लिए कम यात्रा करें.

  • एक परत वाले कपड़े की जगह ढीली फिटिंग वाले परतदार हल्के कपड़े, हवा रोधी/सूती का बाहरी आवरण तथा गर्म ऊनी भीतरी कपड़े पहने.

  • बिना ऊंगली वाले दस्ताने का प्रयोग करे.

  • पर्याप्त रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए विटामिन-सी से भरपूर फल और सब्ज़ियाँ खाएं.

  • गर्म तरल पदार्थ नियमित रूप से पीएं, इससे ठंड से लड़ने के लिए शरीर की गर्मी बनी रहेगी.

  • रूम हीटर के प्रयोग के दौरान पर्याप्त हवा निकासी का प्रबंध रखें.

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