होलिका-दहन आज, तैयारी में लगे रहे लोग

ग्रामीण क्षेत्रों में अपने-अपने घरों से गोईठा ले जाने की है परंपरा डुमरांव : होली, हिंदुओं के पवित्र त्योहारों में से एक है. जिसे बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. इस पर्व को भी असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है. जहां एक तरफ होली वाले दिन सभी तरह-तरह के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | March 1, 2018 3:43 AM

ग्रामीण क्षेत्रों में अपने-अपने घरों से गोईठा ले जाने की है परंपरा

डुमरांव : होली, हिंदुओं के पवित्र त्योहारों में से एक है. जिसे बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. इस पर्व को भी असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है. जहां एक तरफ होली वाले दिन सभी तरह-तरह के रंगों में मलीन दिखायी पड़ते हैं. वहीं दूसरी तरफ इससे एक दिन पूर्व होलिका दहन मनायी जाती है.
जिसे भक्त प्रह्लाद के विश्वास और उसकी भक्ति के रूप में मनाया जाता है. हिंदू पुराणों के अनुसार, जब दानवों के राजा हिरण्य कश्यप ने देखा कि उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की आराधना में लीन हो रहा है, तो उन्हें अत्यंत क्रोध आया. उन्होंने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाये. क्योंकि होलिका को यह वरदान था कि अग्नि उसे नहीं जला सकती. परंतु जब वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी,
वह पूरी तरह जलकर राख हो गयी और नारायण के भक्त प्रह्लाद को एक खरोंच तक नहीं आयी. इसी घटना की याद में इस दिन होलिका दहन करने का विधान है. होली का पर्व संदेश देता है कि इसी प्रकार ईश्वर अपने अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए सदा उपस्थित रहते हैं.
होलिका दहन का इतिहास: होली का वर्णन बहुत पहले से हमें देखने को मिलता है. प्राचीन विजय नगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी में 16वीं शताब्दी का चित्र मिला है, जिसमें होली के पर्व को उकेरा गया है.
ऐसे ही विंध्य पर्वतों के निकट स्थित रामगढ़ में मिले एक ईसा से 300 वर्ष पुराने अभिलेख में भी इसका उल्लेख मिलता है. कुछ लोग मानते हैं कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने पूतना नामक राक्षसी का वध किया था. इसी खुशी में गोपियों ने उनके साथ होली खेली थी.
शुभ मुहूर्त में करें होलिका-दहन
शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल के दौरान करना चाहिए, लेकिन ध्यान रखें कि जब भद्राकाल चल रहा हो तो इस दौरान होलिका दहन नहीं करना चाहिए. भद्राकाल के समय होलिका दहन शुभ नहीं माना जाता है. डॉ भाष्कर मिश्रा ने बताया कि पंचांग के अनुसार इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 26 मिनट से लेकर 8 बजकर 55 मिनट तक रहेगा.

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