27983 में से बंद पड़े हैं 4032 चापाकल
मोतिहारी : जिले में पेयजल की व्यवस्था काफी लचर है. कई चापाकल बंद पड़े है, जबकि कई वाटर टावर शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है. हालांकि पीएचसी विभाग कागज में पेयजल की स्थिति को बेहतर बता रहे है. पीएचडी विभाग मोतिहारी डिविजन के देहाती क्षेत्रों में 17 वाटर टावर है, जिसमें 15 चालू […]
मोतिहारी : जिले में पेयजल की व्यवस्था काफी लचर है. कई चापाकल बंद पड़े है, जबकि कई वाटर टावर शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है. हालांकि पीएचसी विभाग कागज में पेयजल की स्थिति को बेहतर बता रहे है. पीएचडी विभाग मोतिहारी डिविजन के देहाती क्षेत्रों में 17 वाटर टावर है, जिसमें 15 चालू है तथा दो बंद है.
राज्य योजना अंतर्गत ग्रामीण पाईप जलापूर्त्ति योजना के तहत सूर्यपूर, बंजरिया, कोटवा, कल्याणपुर, हरसिद्धि, मलाही, ढ़ेकहां उत्तरी, पिपराकोठी, लखौरा, तुरकौलिया, मधुबनीघाट, संग्रामपुर, ढ़ेकहां दक्षिणी, पश्चिमी, श्रीपुर में वाटर टावर चालू है. वहीं रामगढ़वा तथा मधुबनी के वाटर टावर बंद है. वहीं मोतिहारी पीएचईडी डिविजन के 14 प्रखंडों में वित्तिय वर्ष 2015 तक 27983 चापाकल लगाये गये है. 4032 चापाकल बंद है, जिसमें 977 चापाकल को विशेष मरम्मती की आवश्यकता है, जबकि 3055 चापाकल की आयु पूरी हो गयी है. वित्तिय वर्ष 2015-16 में 1540 चापाकल का लक्ष्य है,
जिसमें एक हजार चापाकल लगाया जा चुका है. वित्तिय वर्ष 2015 तक 27983 चापाकल लगाये गये है, जिसमें 23951 चालू है तथा 4082 बंद पड़े है. सदर प्रखंड में 2757 में 382 चापाकल बंद है, तुरकौलिया में 1745 में 240, हरसिद्धि में 2182 में 307, बंजरिया में 1530 में 182, पिपराकोठी में 787 में 119, कल्याणपुर में 3025 में 387, कोटवा में 1706 में 310, अरेराज में 1960 में 293, संग्रामपुर में 1587 में 260, पहाड़पुर में 1961 में 305, केसरिया में 2049 में 366, रक्सौल में 2240 में 270, रामगढ़वा में 2323 में 297 तथा सुगौली में 2131 में 306 चापाकल बंद है.
