शहर में इक्का-दुक्का सड़कों को छोड़ सभी प्रमुख सड़कें इन दिनों अपने हाल पर आंसू बहा रही हैं. सड़क पर गड्डे हैं या फिर गड्डों में सड़क, पता ही नहीं चलता है. कोहरा पड़ने पर सड़कों पर बने ये गड्ढे ब्लैक स्पॉट के रूप में उभरेंगे और हादसे के सबब बनेंगे. इसके बावजूद अफसरों को इसकी फिक्र नहीं है.
बेतिया : शहर की सड़कों पर विभागीय बजट भले ही साल-दर-साल बढ़ रहा हो लेकिन हालात बदलते नहीं दिख रहे हैं. नगर परिषद, पीडब्ल्यूडी, आरसीडी सालाना… करोड़ से अधिक रकम के खर्च करते हैं इसके बाद भी शहर में गड्ढा युक्त सड़कें ही नजर आती हैं. गुणवत्ता खराब होने से सड़कें बमुश्किल साल भर में ही टूट रही हैं. शिकायत होने पर जांच कमेटियां गठित कर दी जाती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नजर नहीं आता है. नतीजा जर्जर सड़कों पर माननीयों के वादे, अफसरों के इरादे व नप के दावे हिचकोले खा रहे हैं.
खास यह है कि शहर की सड़कें सिर्फ गलियों में ही नहीं प्रमुख मार्गों पर भी उखड़ी हुई नजर आती हैं. करीब… लाख की की लागत से दो साल पहले बनी छावनी से समाहरणालय तक की सड़क पर सिर्फ गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं. सड़क को लेकर स्थानीय लोग आंदोलन भी कर चुके हैं लेकिन कोई असर नहीं हो रहा है. स्टेशन चौक से बानुछापर तक की सड़क भी पूरी तरह टूट चुकी है. वर्ष 2010 में करीब 1.80 करोड़ की लागत से रोड बनवाया गया, लेकिन बनने के साल भर बाद ही सड़क ने दम तोड़ दी. जिम्मेदारों ने दावा किया कि बारिश के चलते सड़क उखड़ रही है. केआर स्कूल जाने वाली रोड तो सबसे बुरा हाल है. प्रसिद्ध स्कूलों को जोड़ने वाला यह रोड छात्रों को हर रोज जख्मी कर रही है. कमोबेशन हॉस्पिटल रोड, नेपाली पथ, संतघाट, राजगुरू चौक रोड, कालीबाग-मनुआपुल रोड की भी यही हाल है.
बानूछापर-स्टेशन चौक मार्ग
मौजूदा हालात: इस सड़क को लेकर कई बार आंदोलन हो चुका है. सड़क पूरी तरह से खत्म हो चुकी है. इस रोड पर रैक प्वाइंट होने के चलते रोजाना 100 से अधिक ट्रक चलते हैं. कई वीआईपी कालोनियां भी इस सड़क से जुड़ी हुई हैं.
छावनी-समाहरणालय वाया तीन लालटेन रोड
मौजूदा हालात: शहर का लाइफ-लाइन है. समाहरणालय, एसपी कार्यालय समेत प्रमुख कार्यालयों को यह रोड जोड़ता है. बनने के साल भर बाद ही इस रोड की गिट्टियां उखड़ गईं. मौजूदा वक्ता में इस रोड में गड्ढे बन गये हैं.
केआर-बेलबाग मार्ग
मौजूदा हालात: गिट्टियां उखड़ चुकी हैं. जगही-जगह गड्डे हो गये हैं. दुर्गामंदिर के पास से डीएसपी आवास तक सड़क बेहद ही खराब है. इस रोड रोज करीब 15 हजार लोग आते-जाते है. आधा दर्जन प्रसिद्ध स्कूल होने की वजह से यह रोड काफी चलन में है.
समस्याएं :
दूरसंचार विभाग, बिजली व पीएचइडी विभाग नवनिर्मित सड़क को भी उखाड़ देते हैं.
तारकोल वाली सड़क जलभराव के चलते साल भर भी
नहीं चलती है.
सड़क की गुणवत्ता कैसे बनी रहे इसके लिए कोई कार्ययोजना नहीं है.
सुझाव :
सड़क निर्माण के दौरान सड़क की समय सीमा ठेकेदार
की ओर से तय हो.
सड़क बनने से पहले सभी विभाग जमीन के अंदर के कार्य करा लें, इसके लिए नोटिस जारी हो
कार्ययोजना बनाते समय शहरवासियों से भी राय ली जाय
बानुछापर मार्ग को लेकर डीपीआर तैयार कर लिया गया है. अभी स्वीकृति नहीं मिली है. समाहरणालय रोड के मरम्मत के लिए जिला परिषद से रोड हस्तानांतरण के लिए पत्राचार किया गया है. अन्य जो भी सड़कें जर्जर हो चुकी हैं. उसका सर्वे कराया जा रहा है. शहर की अन्य सड़कों के मरम्मत व निर्माण की जिम्मेवारी नगर परिषद की है.
ओमप्रकाश गुप्ता, कार्यपालक अभियंता पथ निर्माण विभाग
फैक्ट फाइल
11.12 वर्ग किमी हैं शहर की सड़कें
1.39 लाख शहर की आबादी
39 वार्डों में फैला है शहर
