फोटो संख्या- 09परिचय- खेत में गिरा गेहूं का पौधा सदर. पांच दिन बाद यह आपदा आता तो किसानों को यह दूरदीन देखना नहीं पड़ता. अधिकांश किसान अपना गेहूं तैयार कर घर ले आये होते. अब तो सब कुछ लूट चुका है. दो दिन पूर्व क्षेत्र में अचानक आये आंधी-बारिश एवं ओलावृष्टि से किसानों के खेत में लगा गेहूं बर्बाद हो चुका है. इस आपदे में प्रखंड क्षेत्र के करीब हजारों एकड़ जमीन में लगे गेहूं नष्ट हो गया है. हालांकि किसानों के खेत में लगा गेहूं तैयार हो चुका था. इक्का-दुक्का किसान काटना भी शुरू कर दिये थे. मौसम सामान्य रहता तो पांच दिन के भीतर अधिकांश किसान अपना गेहूं तैयार कर घर ले आते. वासुदेवपुर पंचायत के सोनहान गांव निवासी किसान हरिकृष्ण यादव अपने तीन बीघा जमीन में गेहूं की फसल लगाये थे. इसके लिए उनका 45 हजार रुपये पटवन, खाद आदि में पंूजी लगा था. इस आपदा में उनका सब बर्बाद हो चुका है. वे कहते हैं कि अब तो पूंजी भी डूब चुकी है. महाजन का कर्ज व परिवार का भरण-पोषण कैसे हो पायेगा. शहवाजपुर करहटिया के मो शब्बानी एक बीघा में गेहूं की खेती किये थे. इसके लिए उन्हें दस हजार के करीब पूंजी लगानी पड़ी थी. उनका कहना है कि अब तो सब डूब चुका है. गेहूं की फसल अच्छा रहने से वे गदगद हो रहे थे कि पूंजी के साथ-साथ कुछ लाभ भी मिल जायेगा, लेकिन आपदा ने पानी फेर दिया. इसी तरह नवीजान, अलाउद्दीन, भीखर महतो, इजहार, रामपवित्र पासवान आदि ने भी अपने एक से तीन बीघा जमीन में गेहूं का खेती किये थे, लेकिन आंधी-बारिश में सब नष्ट हो गया. फसल जमीन पर गिर गया है. अब तो उसे काट भी नहीं सकते. सरकार की तरफ से भी कुछ मुआवजा नहीं मिलता है.
... तो यह दुर्दीन किसानों को नहीं होता
फोटो संख्या- 09परिचय- खेत में गिरा गेहूं का पौधा सदर. पांच दिन बाद यह आपदा आता तो किसानों को यह दूरदीन देखना नहीं पड़ता. अधिकांश किसान अपना गेहूं तैयार कर घर ले आये होते. अब तो सब कुछ लूट चुका है. दो दिन पूर्व क्षेत्र में अचानक आये आंधी-बारिश एवं ओलावृष्टि से किसानों के खेत […]
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