profilePicture

पेड़ों में पानी डाल प्रकृति प्रेम का मना पर्व जुड़ शीतल

फोटो : 02परिचय : जुड़शीतल पर पेड़ों में पानी डालते बच्चे कमतौल . वैसे तो सभी व्रत-त्योहार मानव कल्याणार्थ ही मनाये जाते हैं़ लेकिन तपती बैशाख माह में मनाया जाने वाला जुड़ शीतल का पर्व, जिसमें प्रकृति का कल्याण भी समाहित होता है़ पर्व के नाम पर पर्यावरण संरक्षण का काम भी एक साथ होता […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 15, 2015 6:03 PM

फोटो : 02परिचय : जुड़शीतल पर पेड़ों में पानी डालते बच्चे कमतौल . वैसे तो सभी व्रत-त्योहार मानव कल्याणार्थ ही मनाये जाते हैं़ लेकिन तपती बैशाख माह में मनाया जाने वाला जुड़ शीतल का पर्व, जिसमें प्रकृति का कल्याण भी समाहित होता है़ पर्व के नाम पर पर्यावरण संरक्षण का काम भी एक साथ होता है़ जुड़ शीतल पर्व में पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश छिपा है़ इस पर्व में जहां घर के बड़े लोग अपने से छोटों के सिर पर पानी डाल उनकी सुख-समृद्घि की कामना करते हैं, वहीं पेड़-पौधे में पानी डाला जाता है. पेड़ की जड़ में पानी डालने से जुड़ शीतल होता है. नवजीवन का संचार होने लगता है़ मान्यता है कि पेड़ अपनी छाया से आम जनजीवन को सालों भर फल-फूल के साथ शीतलता प्रदान करते रहते हैं़ इस दिन चूल्हे जलाने पर भी धार्मिक प्रतिबंध रहता है़ नाम से ही शीतलता का बोध कराने वाला पर्व जुड़शीतल तपती वैशाख में मनाया जाता है़ इस पर्व में अहले सुबह घर के बड़े-बुजुर्ग छोटों के सिर पर पानी डालकर उनकी खुशहाली की कामना करते हैं़ इस दिन पेड़-पौधे में पानी डाला जाता है़ संस्कृत उच्च विद्यालय अहल्यास्थान के प्राचार्य कालीकान्त झा कहते हैं की पेड़-पौधे जिंदा रहेंगे, तो नि:संदेह धरती पर शीतलता व खुशहाली रहेगी़ महिलाएं सड़कों पर पानी डालती हैं़ मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्घि के साथ भाई की आयु बढ़ती है़ इस दिन चूल्हा नहीं जलाने कि परंपरा है़ साल में चूल्हे को एक दिन आराम दिया जाना चाहिये. पर्व के दिन बासी भोजन चूल्हे को भोग लगाकर परोसा जाता है़ एक दिन एक साथ बड़ी संख्या में चूल्हे नहीं जलने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गैस से मुक्ति मिलेगी़

Next Article

Exit mobile version