स्कूल में सब कुछ हुआ, पढ़ाई खत्म हो गयी
सुबह के साढ़े दस बजे हैं. हावड़ा से जयनगर जाने वाली धुरियान पैसेंजर के 15 मिनट देर से दरभंगा जंकशन पर आने की सूचना है. 11.15 में ट्रेन के प्लेटफॉर्म संख्या पांच पर आने की घोषणा होती है. ट्रेन का इंतजार कर रहे लोग पांच नंबर प्लेटफॉर्म पर पहुंचते हैं. जंकशन पर पांच मिनट रुकने […]
सुबह के साढ़े दस बजे हैं. हावड़ा से जयनगर जाने वाली धुरियान पैसेंजर के 15 मिनट देर से दरभंगा जंकशन पर आने की सूचना है. 11.15 में ट्रेन के प्लेटफॉर्म संख्या पांच पर आने की घोषणा होती है. ट्रेन का इंतजार कर रहे लोग पांच नंबर प्लेटफॉर्म पर पहुंचते हैं. जंकशन पर पांच मिनट रुकने के बाद ट्रेन मधुबनी के लिए रवाना हो जाती है. मैं ट्रेन में सवार हो जाता हूं.
मेरे बगल की सीट पर एक नौजवान हाथ में झोला लिये करंट अफेयर्स पढ़ रहा है. वो नाम बताने से इनकार कर देता है, लेकिन ये बताता है कि घनश्यामपुर प्रखंड का रहनेवाला हूं और यूपीएससी की तैयारी कर रहा हूं. पास में जयनगर के रहनेवाले अर्जून कुमार दास बैठे हैं. कहते हैं, गैस पाइप लाइन बिछानेवाली कंपनी में कांट्रैक्ट पर काम करता हूं. कोलकाता से इंटरव्यू देकर आ रहा हूं. चुनाव की चर्चा होते ही बोल पड़ता है, यहां क्या रखा है. मुङो तो बाहर जाकर काम मिला. यहां अपराध की घटनाएं हो जाती हैं. ऐसे में कोई बाहर से काम करने क्यों आयेगा?
सामने की सीट पर बैठे भालपट्टी निवासी शंभू झा बैठे हैं. कहते हैं, इस बार बेहतर माहौल बनाना है. वे अपने भाई बबलू झा को दिल्ली जानेवाली बिहार संपर्क क्र ांति एक्सप्रेस पकड़ाने के लिए दरभंगा आये हुए थे. बिरौल से समस्तीपुर आने वाली पैसेंजर ट्रेन के इंजन में तारसराय-बिजली हॉल्ट के बीच आग लग जाने के कारण देरी हो गयी. इस वजह से उनका भाई दिल्ली नहीं जा सका. दोनों भाई वापस गांव लौट रहे हैं. बातचीत के बीच ट्रेन काकरघाटी स्टेशन पर ट्रेन पहुंचजाती है.
मैं दूसरी बोगी में चला जाता हूं. यहां पहले नजर दो छात्रों पर पड़ती है, जो आपस में बतिया रहे हैं. कहते हैं एमएलएस कॉलेज से लौट रहा हूं, नाम रजनीश कुमार झा है. पेपर में छपा था, रजिस्ट्रेशन फीस तीन सौ है, लेकिन लिये चार सौ जा रहे हैं. उसके साथ नरपतिनगर का छात्र मो कमरे आलम भी है. वह कॉलेज की चर्चा करते हुए कहता है कि पढ़ायी नहीं होती है. केवल चार-पांच छात्र ही आते हैं. सर, बीस से पच्चीस छात्रों से कम में पढ़ाने को तैयार नहीं हैं. दोनों छात्रों के इतना बोलते ही बहस छिड़ जाती है. राजनगर के रामकुमार मंडल कहते हैं कि स्कूल में सब चीज हो गयी, लेकिन पढ़ाई खत्म हो गयी. आज साइकिल, पोशाक देना सरकार बंद कर दे, तो एक भी बच्चा स्कूल नहीं आयेगा. शिक्षक भी क्या करें? उन्हें पढ़ाने के बदले खिचड़ी में उलझा दिया गया है.
राजनगर जयपट्टी के रहनेवाले शिव कुमार यादव घर लौट रहे हैं. कहते है हमरा गांव के लोग ई बेर केकरो वोट नहीं देगा. हम क्यों दें? हमरा गांव का एक भी सड़क पीसीसी नहीं हुआ. रजनीश कहते हैं, वोट तो जरूरे दीजिये, लेकिन ऐसे प्रत्याशी को दीजिये जो आपके बीच काम करे. इस बीच ट्रेन सकरी स्टेशन पर 12.20 बजे पहुंच जाती है. सकरी से ट्रेन खुलते ही मुलाकात मधुबनी महिला महाविद्यालय में कार्यरत डॉ अनिल कुमार झा से होती है. चुनाव में पेट्रोलिंग की ड्यूटी में अनिल को लगाया गया है, जिसकी ट्रेनिंग के लिए जा रहे हैं. इसी तरह बातचीत चलती रहती है और ट्रेन मधुबनी स्टेशन पर पहुंच जाती है.यात्री ट्रेन से उतरने की तैयारी में लग जाते हैं.
अनिल से बात शुरू होती है, तभी ट्रेन उगना हॉल्ट पहुंच जाती है. यहीं पर उगना महादेव का मंदिर है. महाकवि विद्यापति यही आकर पूजा करते थे. अनिल के बगल में पुलिस के जवान विद्याधर झा बैठे हैं. वे मधुबनी में अपने घर जा रहे हैं. कहते हैं कि इस बार का चुनाव अलग होगा, जो अच्छा काम करेगा, वो जीतेगा. विद्याधर के बगल में लालू कुमार यादव नाम का युवक कान में इयर फोन लगा कर गाना सुनने के साथ केला खा रहा है और बेतरतीब तरीके से प्लेटफार्म पर फेक रहा है.
बीए पार्ट-वन में पढ़नेवाले लालू को स्वच्छता से कोई मतलब नहीं लगता है. 18 साल से ज्यादा के लालू इस बार वोटर लिस्ट में नाम नहीं जुड़वा सके. लालू राजनीति पर भी ज्यादा बात करने से कतराते हैं. इसी बीच ट्रेन मधुबनी स्टेशन पर पहुंच जाती है. यात्री ट्रेन से उतरने की तैयारी में लग जाते हैं.
