Darbhanga News: दरभंगा. दवा वह है, जो आपको फायदा ज्यादा और नुकसान कम करे. जैव सूचना विज्ञान, चिकित्सा के क्षेत्र में काफी उपयोगी हो रहा है. मानव जीनोम की पूरी प्रणाली ने कई बीमारियों के लिए आनुवंशिक योगदान को उजागर करने में मदद की है. जैव सूचना का प्रयोग करके हम दवा की खोज, चिकित्सा और जैव थेरेपी में काफी आगे जा सकते हैं. यह बातें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. इन्द्रकांत कुमार सिंह ने लनामिवि के जंतु विज्ञान विभाग और डॉ प्रभात दास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान में कही. “जैव सूचना विज्ञान का उदय : औषधि खोज में डिजिटल क्रांति ” विषयक व्याख्यान में डॉ सिंह ने कहा कि जैव सूचना विज्ञान खासकर कैंसर की दवा के विकास के लिए उपयोगी है. दवा की खोज में जैव सूचना विज्ञान बड़े पैमाने पर जैविक डेटा के कुशल विश्लेषण और व्याख्या को सक्षम बनाता है. फार्माकोलॉजी में जीनोमिक, ट्रांसक्रिप्टोमिक और प्रोटिओमिक डेटा का उपयोग उन दवाओं की खोज में किया जा रहा है, जो अपूरित चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करती है. नवीन चिकित्सा खासकर कैंसर, गुलकोमा और किसी भी क्रोनिकल बीमारी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का योगदान बढ़ता जा रहा है.
जैव सूचना विज्ञान से रोगियों के उपचार में आयेगा क्रांतिकारी परिवर्तन- डॉ आरती
अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ आरती कुमारी ने जैव सूचना विज्ञान के गहन प्रभाव को स्पष्ट की. कहा कि भविष्य में औषधि अनुसंधान के लिए इसकी परिवर्तनकारी क्षमता रोगियों के उपचार में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा. डॉ अर्चना सिंह ने “पादप-शाकाहारी परस्पर क्रिया के आणविक पहलू ” विषय पर व्याख्यान दी. बताया कि पौधों और शाकाहारी जीवों के बीच होने वाली जैविक क्रियाएं कैसे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती है. संचालन डॉ कुमार मनीष ने किया. अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ से डॉ पारुल बनर्जी ने किया. व्याख्यान में डॉ सुशोभन बनिक, डॉ अतनु बनर्जी, फाउंडेशन के मुकेश कुमार झा, आनंद प्रकाश, अर्चना आदि मौजूद थे.
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