प्लस टू स्कूलों में राज्य के बाहरी भी बन सकेंगे शक्षिक

प्लस टू स्कूलों में राज्य के बाहरी भी बन सकेंगे शिक्षकबीएड के साथ पीजी की डिग्री वाले नहीं मिल रहे अभ्यर्थीबिहार का निवासी होने की बाध्यता होगी खत्म, शिक्षा विभाग तैयार कर रहा प्रस्तावसंवाददाता, पटनाराज्य के प्लस टू स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए बिहार के निवासी होने की बाध्यता खत्म हो सकती है. अब […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

प्लस टू स्कूलों में राज्य के बाहरी भी बन सकेंगे शिक्षकबीएड के साथ पीजी की डिग्री वाले नहीं मिल रहे अभ्यर्थीबिहार का निवासी होने की बाध्यता होगी खत्म, शिक्षा विभाग तैयार कर रहा प्रस्तावसंवाददाता, पटनाराज्य के प्लस टू स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए बिहार के निवासी होने की बाध्यता खत्म हो सकती है. अब बिहार के बाहर के अभ्यर्थियों की भी प्लस टू स्कूलों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति की जा सकती है. शिक्षा विभाग इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है. प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी और प्रधान सचिव डाॅ डीएस गंगवार की सहमति के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी और अगले साल शुरू होनेवाली नयी नियुक्ति प्रक्रिया में इसे लागू किया जा सकेगा. वर्तमान में प्लस टू स्कूलों में शिक्षक के रूप में उन्हीं अभ्यर्थियों की नियुक्ति होती है, जो बिहार के निवासी हैं. साथ ही उनकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता एसटीइटी पास करने के साथ-साथ बीएड व पोस्ट ग्रेजुएट आवश्यक है. एसटीइटी पास जो अभ्यर्थी बीएड के साथ पीजी नहीं किये हैं, वे प्लस टू स्कूलों में शिक्षक नहीं बन सकते हैं. बिहार में बीएड के साथ पीजी वाले अभ्यर्थी नहीं मिल रहे हैं. इस वजह से प्लस टू स्कूलों में गणित, विज्ञान, अंगरेजी समेत कई अन्य विषय की सीट खाली रह जा रही है. इन विषयों में भी सामान्य वर्ग की अधिकतर सीटें तो भर गयी हैं, लेकिन आरक्षित कोटि की सीटों के लिए अभ्यर्थी नहीं मिल रहे हैं. सूत्रों की मानें तो अगर प्लस टू स्कूलों की नियुक्ति में बिहार के बाहर के अभ्यर्थियों को मौका दिये जाने पर सहमति बनती है, तो उससे पहले 2016 में होनेवाले एसटीइटी में भी बिहार के बाहर के अभ्यर्थियों को शामिल होने का मौका दिया जायेगा और विज्ञापन के जरिये उन्हें आमंत्रित किया जायेगा.तीन प्रकार के तैयार हो रहे प्रस्ताव1. शिक्षा विभाग तीन प्रकार के प्रस्ताव तैयार करने में लगा है. पहले प्रस्ताव में वह नियुक्ति नियमावली में बदलाव करना चाहता है. नियुक्ति नियमावली में प्लस टू स्कूलों में वही अभ्यर्थी शिक्षक बन सकते हैं, जो बिहार के निवासी हैं. इसे शिथिल किया जा सकता है. ऐसे में दूसरे राज्यों से भी योग्य अभ्यर्थी बिहार में आवेदन कर सकेंगे और शिक्षक बन सकेंगे. इससे प्लस टू स्कूलों में शिक्षकों के जो पद रिक्त रह जा रहे हैं, वह भरे जा सकेंगे. वर्तमान में विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली में इसी प्रकार की प्रक्रिया चल रही है. 2. दूसरे प्रकार का जो प्रस्ताव बन रहा है कि उसमें एसटीइटी, बीएड रहना आवश्यक तो रहेगा, लेकिन पीजी को एक बार नियुक्ति के लिए शिथिल किया जा सकता है. इससे एसटीइटी, बीएड और स्नातक रहे अभ्यर्थी को मौका दिया जा सकता है. इससे भी शिक्षकों को जो पद रिक्त रह जा रहे हैं, वह आसानी से भरे जा सकते हैं. 3. तीसरे प्रकार के प्रस्ताव है कि बिहार में एसटीइटी पास हैं और पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं, लेकिन बीएड किये हुए नहीं है. कई तो बीएड-पोस्ट ग्रेजुुएट हैं, लेकिन एसटीइटी पास नहीं है. ऐसे में एक बार नियमों को शिथिल कर अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नियुक्ति की जाये. प्लस टू स्कूलों के 12 हजार पद हैं रिक्तराज्य में प्लस टू स्कूलों में नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया अब भी जारी है. सरकार ने हर पंचायत में एक प्लस टू स्कूल की स्थापना का पहले ही निर्णय लिया है. पंचायतों में प्लस टू स्कूल खोलने व हाइ स्कूल को प्लस टू में अपग्रेड करने की प्रक्रिया भी चल रही है. 1291 नये प्लस टू स्कूल खोले जा चुके हैं, जबकि आनेवाले नये सत्र से 1000 और प्लस टू स्कूल खोलने का लक्ष्य है. शिक्षा विभाग ने आने वाले कई सालों तक के लिए प्लस टू स्कूलों में 95 हजार पद सृजित किये हैं. शिक्षा विभाग ने पहले चरण में प्लस टू स्कूलों में 17,583 पदों पर बहाली प्रक्रिया शुरू की. इसमें से अब तक 5,391 शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है. बाकी 12,191 पद फिलहाल खाली हैं, जिसे भरने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है. नये प्लस टू स्कूलों के लिए शिक्षा विभाग ने जिलों से भी आवश्यक शिक्षकों की संख्या मांगी है. इसी आधार पर नयी नियुक्ति प्रक्रिया में पुरानी रिक्तियां और नये प्लस टू स्कूलों के पदों को जोड़ कर बहाली की जायेगी. प्लस टू स्कूलों में कम से कम 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति होने की संभावना है.

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