घोटाले की एसआइटी करेगी जांच

नौ करोड़ से अधिक के धान खरीद घोटाले में हाइकोर्ट के कड़े रुख के बाद विभाग ने घोटाले की फाइल को खोल कर कार्रवाई शुरू कर दी है. घोटाले में लिप्त राइस मिलों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं. संजय कुमार अभय गोपालगंज : बिहार के चर्चित धान घोटाले की अब एसआइटी की टीम जांच […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
नौ करोड़ से अधिक के धान खरीद घोटाले में हाइकोर्ट के कड़े रुख के बाद विभाग ने घोटाले की फाइल को खोल कर कार्रवाई शुरू कर दी है. घोटाले में लिप्त राइस मिलों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं.
संजय कुमार अभय
गोपालगंज : बिहार के चर्चित धान घोटाले की अब एसआइटी की टीम जांच करेगी. इस घोटाले में गोपालगंज की पांच राइस मिलें भी शामिल हैं. जिन पर पहले से विभाग के स्तर पर कार्रवाई चल रही है. इन राइस मिलों पर पहले से थानों में प्राथमिकी दर्ज करायी जा चुकी है.
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस की जांच फाइलों में उलझी हुई है. इधर, विभाग ने राइस मिलों को समतुल्य राशि बैंक के एकांउट में 23 मार्च तक जमा करने का आदेश दिया था. विभाग के नोटिस के बाद भी इन राइस मिलों ने समतुल्य राशि बैंक में जमा नहीं की है. अब हाइकोर्ट के कड़े रुख के बाद एसआइटी को पूरा रिकाॅर्ड सौंपने की तैयारी की जा रही है. इस घोटाले की हाइ लेवेल पर बिहार स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाइ कारपोरेशन के एमडी पंकज कुमार लगातार मॉनीटरिंग कर रहे हैं, जिससे विभाग के अधिकारियों से लेकर कर्मियों तक की बेचैनी बढ़ी हुई है.
जांच के दायरे में तत्कालीन अधिकारी : धान घोटाले में राइस मिलों के साथ अधिकारियों की भी सेटिंग सामने आयी है.
तत्कालीन जिला प्रबंधक भी जांच के दायरे में हैं. बता दें कि वर्ष 2012-13 में थावे के फुलुगनी स्थित मां काली मॉर्डन राइस मिल में 39.32 लाख रुपये का चावल राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध नहीं कराया था. लेकिन सेटिंग के बदौलत दूसरे वर्ष 2013-14 में चावल तैयार करने के लिए उससे एग्रीमेंट किया गया, जिसमें 80.18 लाख का घोटाला दूसरे वर्ष किया. उसी तरह संकट मोचन राइस मिल कोयला देवा में 2012-13 में 40.86 लाख का चावल राइस मिल ने नहीं दिया था, लेकिन दूसरे वर्ष उसे फिर घोटाला का मौका दिया गया और 53.94 लाख का घोटाला इस राइस मिल ने दूसरे वर्ष कर लिया.
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