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गली और नाली में फर्क करना मुश्किल

जहानाबाद (नगर) : गली में नाली है या नाली में गली यह फर्क करना मुश्किल हो गया है. गलियों में बजबजाती गंदगी तथा गंदगी से निकलनेवाली सड़ांध बीचली मुहल्ला स्थित न्यू कॉलोनी की पहचान बन गयी है.प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरीSpies In Mauryan Dynasty : मौर्य काल से ही चल रही है ‘रेकी’ की परंपरा, […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 23, 2015 12:51 AM

जहानाबाद (नगर) : गली में नाली है या नाली में गली यह फर्क करना मुश्किल हो गया है. गलियों में बजबजाती गंदगी तथा गंदगी से निकलनेवाली सड़ांध बीचली मुहल्ला स्थित न्यू कॉलोनी की पहचान बन गयी है.

इन इलाकों में गंदगी से घरों से निकलना दुश्वार हो गया है, वहीं गंदगी से निकलनेवाली दरुगध ने जीना मुहाल कर दिया है. यह हाल नगर पर्षद के वार्ड नंबर 22 स्थित न्यू कॉलोनी का है. कहने को तो इस मुहल्ले के लोग शहरी इलाके में रहने का दंभ भरते हैं, लेकिन हालात ग्रामीण इलाकों से भी बदतर है. घरों के बाहर लगी गंदगी के अंबार में सुअरों का बसेरा बना है,

जो आते -जाते लोगों को यह एहसास दिलाता है कि यहां उनका साम्राज्य कायम है . शहर के न्यू मुहल्ले से होकर लाल मंदिर इलाका, बड़ी संगत, ढिबरा पर सहित कई मुहल्लों के नालियों के पानी का निकास होता है. गंदे पानी के निकास के लिए कहने को, तो नाली का निर्माण कराया गया है

लेकिन सफाई के अभाव में नालियों का अस्तित्व समाप्त हो गया है. नालियां जाम रहने के कारण कई मुहल्लों का गंदा पानी न्यू मुहल्ले की गलियों में फैला हुई है. इससे गली और नाली में फर्क करना मुश्किल हो गया है. हालात इस कदर बदतर है कि घरों से बाहर निकलनेवाले लोग अपने मुंह पर रूमाल रख कर ही घर से बाहर निकल पाते हैं. सफाई के अभाव में निकलनेवाले दरुगध से महामारी फैलने की संभावना व्यक्त की जा रही है, लेकिन नगर पर्षद प्रबंधन का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है.

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