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डॉक्टरों के अभाव में बंद है गहन चिकत्सिा विभाग

डॉक्टरों के अभाव में बंद है गहन चिकित्सा विभाग गंभीर मरीजों को पटना किया जा रहा रेफर फोटो -8,9 इंट्रो: गहन चिकित्सा विभाग किसी अस्पताल का वह विभाग होता है जहां गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इलाज किया जाता है. जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में करोड़ों की लागत से आइसीयू भवन के साथ […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 30, 2015 7:31 PM

डॉक्टरों के अभाव में बंद है गहन चिकित्सा विभाग गंभीर मरीजों को पटना किया जा रहा रेफर फोटो -8,9 इंट्रो: गहन चिकित्सा विभाग किसी अस्पताल का वह विभाग होता है जहां गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इलाज किया जाता है. जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में करोड़ों की लागत से आइसीयू भवन के साथ ही इस युनिट को तैयार किया गया . लाखों रुपये मूल्य के उपकरण लगाये गये हैं लेकिन चिकित्सकों के अभाव में इस विभाग में ताला लटका हुआ है . कई वर्ष पूर्व जिला प्रशासन के दबाव में इस युनिट का उद्घाटन तो हो गया लेकिन इसका लाभ आज तक किसी भी मरीज को नही मिल पाया .जहानाबाद(नगर). मरीजों को गहन चिकित्सा प्रदान करने वाला गहन चिकित्सा विभाग खुद बीमार है. चिकित्सक के अभाव में गहन चिकित्सा विभाग में ताला लटक रहता है . वहीं गंभीर मरीज के साथ ही सामान्य मरीजों को भी पटना रेफर कर दिया जाता है . सदर अस्पताल में आज से पांच वर्ष पूर्व करोड़ों की लागत से गहन चिकित्सा विभाग की स्थापना की गयी . विभाग का नया भवन बना तथा इसमें लाखों रुपये के उपकरण लगाये गये . यहां तक की वेंटिलेटर , कार्डियोमॉनिटर के साथ ही अन्य उपकरण लगाये गये, लेकिन इन उपकरणों का उपयोग नहीं हो पाया . प्रशासन द्वारा आइएपी योजना के तहत गहन चिकित्सा विभाग में कई एसी भी लगाये गये लेकिन सब बेकार पड़े हैं . चिकित्सक के अभाव के कारण आज तक गहन चिकित्सा विभाग में ताला लटका हुआ है वहीं विभाग में लगे कीमती उपकरण को जंक खा रहा है .कई चिकित्सकों को दिया गया है प्रशिक्षण :गहन चिकित्सा विभाग के निर्माण के बाद सदर अस्पताल में पदस्थापित कई चिकित्सकों को आइसीयू का प्रशिक्षण दिया गया . इसके लिए चिकित्सकों को कोलकाता तथा पटना में कई-कई दिनों तक प्रशिक्षित किया गया . वहीं नर्सिंग स्टाफ को भी आइसीयू का प्रशिक्षण दिया गया है . इसके बावजूद भी आज तक आइसीयू की सेवा मरीजों को नहीं मिली . आइसीयू चालू हुए कई वर्ष बीत गये लेकिन आज तक एक मरीज को भी इसका लाभ नहीं मिल पाया है . पटना रेफर किये जाते हैं मरीज :जिले में आइसीयू की सुविधा उपलब्ध रहने के बावजूद मरीजों को सीधे पटना रेफर कर दिया जाता है . कोई भी चिकित्सक मरीज को यहां रखने की जहमत नहीं उठाना चाहता और वह मरीज को सीधे पटना रेफर करने में ही भलाई समझते हैं . आइसीयू की सुविधा रहते हुए भी गंभीर मरीज की बात तो दूर सामान्य रूप से घायल या बीमार मरीज को भी पटना रेफर कर दिया जाता है . प्रतिदिन तीन चिकित्सक की है आवश्यकता :गहन चिकित्सा विभाग को चलाने के लिए प्रतिदिन तीन चिकित्सकों की आवश्यकता है . इसके साथ ही छह ए ग्रेड तथा तीन फोर्थ ग्रेड स्टाफ की आवश्यकता है . स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों तथा नर्सिग स्टाफों की कमी के कारण आइसीयू में किसी को पदस्थापित नहीं किया गया है . जिसके कारण यह विभाग बंद पड़ा है . स्वास्थ्य विभाग में जितने चिकित्सक कार्यरत हैं उनसे पूरे जिले की स्वास्थ्य सेवा को बहाल रखना ही मुश्किल हो रहा है . क्या कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक :चिकित्सकों की कमी के कारण आइसीयू सेवा बंद है . विभाग द्वारा पर्याप्त संख्या में चिकित्सक तथा नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध कराये जाने के बाद ही आइसीयू की सेवा मरीजों को प्रदान किया जा सकेगा . – डाॅ के के राय

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