Kaimur News : अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच ही सिमट कर रह गया स्थापना दिवस
17 मार्च 1991 को रोहतास से अलग होकर कैमूर जिला बना था, इसीलिए 17 मार्च को कैमूर जिले का स्थापना दिवस मनाया जाता है. वहीं, 22 मार्च को बिहार स्थापना दिवस मनाया जाता है.
भभुआ कार्यालय. 17 मार्च 1991 को रोहतास से अलग होकर कैमूर जिला बना था, इसीलिए 17 मार्च को कैमूर जिले का स्थापना दिवस मनाया जाता है. वहीं, 22 मार्च को बिहार स्थापना दिवस मनाया जाता है. जिले में कैमूर व बिहार के स्थापना दिवस को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है, इसके लिए सूबे की सरकार की तरफ से जिले को राशि भी दी जाती है. लेकिन, धीरे-धीरे साल दर साल स्थापना दिवस पर होने वाला कार्यक्रम सिमटता चला जा रहा है. पहले 17 मार्च को कैमूर के स्थापना दिवस से लेकर 22 मार्च बिहार के स्थापना दिवस तक छह दिनों तक लगातार कार्यक्रम आयोजित होते थे. इस मौके पर जगजीवन स्टेडियम में हर वर्ष भव्य कार्यक्रम का आयोजन होता था, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्रित होते थे. नामी गिरामी कलाकार स्थापना दिवस पर होने वाले कार्यक्रम में आते थे व उन कलाकारों के कार्यक्रम के जरिये लोगों को जिला स्थापना दिवस व बिहार स्थापना दिवस के बारे में विस्तृत जानकारी देने के साथ जिलेभर के लोग भी इसे एक महत्वपूर्ण उत्सव के रूप में मनाते थे. बड़ी संख्या में आम लोग इसमें शामिल होते थे. इसके अलावा इस मौके पर सभी विभागों द्वारा स्टेडियम में स्टॉल लगाया जाता था. इस दौरान खेलकूद के कार्यक्रम से लेकर प्रभात फेरी सहित कई अन्य तरह के कार्यक्रम आयोजित होते थे, लेकिन इस बार जिले का स्थापना दिवस जगजीवन स्टेडियम के बजाय लिच्छवी भवन में अधिकारियों व कर्मियों के बीच ही सिमट कर रह गया. सोमवार को जिला स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में स्थिति का आलम यह रहा कि लिच्छवी भवन में जहां 250 लोगों के बैठने के लिए चेयर लगाये गये थे, वह भी पूरी तरह से भर नहीं पाया और कुर्सियां खाली रह गयीं. इस तरह से जिला स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उदासीनता देखी गयी, वह स्पष्ट रूप से यह बता रहा था कि कार्यक्रम को लेकर इसके नोडल विभाग कला व संस्कृति, शिक्षा विभाग सहित सामान्य शाखा द्वारा व्यापक प्रचार प्रसार या कार्यक्रम को कैसे भव्य रूप दिया जाये, इसे लेकर पूरी ईमानदारी के साथ प्रयास नहीं किया गया. इसका नतीजा रहा कि जिले के लिए गौरव के रूप में मनाया जाने वाला जिला स्थापना दिवस कुछ लोगों के बीच से सिमट कर रहा है. इस वर्ष स्थापना दिवस के मौके पर 17 मार्च को लिच्छवी भवन में स्थानीय कलाकारों का सांस्कृतिक कार्यक्रम, पेंटिंग, रंगोली जिले की प्रतिभाओं को सम्मान व 19 मार्च को अधौरा आदि आद्री महोत्सव का आयोजन किया गया है. = कला व संस्कृति विभाग के अधिकारी भी पदस्थापित जिला स्थापना दिवस, बिहार दिवस, युवा दिवस सहित इस तरह के मौकों पर कार्यक्रम के आयोजन के लिए कला व संस्कृति विभाग द्वारा जिले में कला व संस्कृति पदाधिकारी की पदस्थापन की गयी है. उक्त पदाधिकारी की तैनाती के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि इस तरह के आयोजन और वृहद रूप लेंगे. साथ ही कला व संस्कृति के क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं को इन मौके पर जब अपने स्थानीय लोगों के बीच मौका मिलेगा, तब उनके अंदर की प्रतिभा में और निखार आयेगी. लेकिन इस बार स्थापना दिवस पर जिस तरह से होने वाला कार्यक्रम कुछ लोगों के बीच सिमट कर रह गया, उसे स्थानीय लोगों ने स्पष्ट रूप से विभागीय उदासीनता का नतीजा बताया है. = अनुमंडल व प्रखंडों में स्थापना दिवस पर होते थे कार्यक्रम पिछले कई वर्षों के इतिहास पर नजर डाले तो जिला स्थापना दिवस व बिहार दिवस के मौके पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किये जाते थे. यहां तक कि जिला से लेकर अनुमंडल व प्रखंड तक विभिन्न तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता था. सभी सरकारी भवनों को लाइटों से सजाया जाता था. महापुरुषों की मूर्तियों की साफ सफाई कर उसे पर माल्यार्पण व उस पर लाइट लगायी जाती थी. प्रखंडों में प्रभात फेरी निकाली जाती थी, दीपक जलाया जाता था. बाहर की बड़े कलाकार इस मौके पर जिले में अपनी प्रस्तुति देते थे. लेकिन इस वर्ष इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन नहीं होने से स्थापना दिवस काफी उदासीन रहा. क्या कहते हैं स्थानीय लोग –जदयू नेता सह समाजसेवी चंद्र प्रकाश आर्य ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जिला स्थापना दिवस के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है. तैयारी को लेकर जो बैठक आयोजित की जाती है उसका मैं भी सदस्य हूं. उस बैठक में ऐसा लगता है कि प्रशासन स्थानीय लोेगों को बुलाकर सिर्फ खानापूर्ति करती है, जो उन्हें करना होता है वह पहले ही तय किये रहते हैं. हमलोगों की राय पर विचार नहीं किया जाता है. अगर जिला स्थापना दिवस कार्यक्रम इसी तरह सिमटता गया, तो लोग इसे भूल जायेंगे. — राजद नेता सह दिघार पंचायत के मुखिया भोला यादव ने कहा कि जिला स्थापना दिवस तो पहले जगजीवन स्टेडियम में मनाया जाता था, लेकिन केवल लिच्छवी भवन में मनाया जाना जिला प्रशासन का यह निर्णय है. आम जनता का यह निर्णय नहीं हो सकता है. जिला स्थापना दिवस पर क्या कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, इसकी जानकारी लोगों के बीच नहीं है, जो स्पष्ट रूप से बता रहा है कि प्रचार प्रसार का अभाव है. = क्या कहते हैं पदाधिकारी कला व संस्कृति पदाधिकारी सुमन सौरभ ने बताया कि जिला स्थापना दिवस व बिहार दिवस को मनाने के लिए विभाग की तरफ से जिले को राशि प्राप्त हुई है. इस मौके पर सोमवार को लिच्छवी भवन में संस्कृति कार्यक्रम, रंगोली, पेंटिंग व जिले के प्रतिभाओं का सम्मान रखा गया है. 19 तारीख को अधौरा में आदि आद्री महोत्सव का आयोजन है. बिहार दिवस पर 22 मार्च को भी कला व संस्कृति विभाग की तरफ से जिले में कार्यक्रम आयोजित किया जाना है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
