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बगैर पढ़े ही परीक्षा में शामिल होंगे बच्चे

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By Prabhat Khabar Digital Desk | March 27, 2016 6:16 AM

चालू सत्र समाप्त होने में बचे हैं मात्र तीन से चार दिन

कटिहार : यूं तो बिहार सहित देश भर में मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 व आरटीइ नियमावली बिहार 2011 के तहत 6-14 वर्ष तक के सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का संवैधानिक अधिकार है. लेकिन आरटीइ के लागू होने के बाद भी जिले में प्रारंभिक विद्यालयों में शैक्षणिक स्तर पर लगातार गिरावट होती जा रही है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का भले ही सरकार या स्थानीय शिक्षा विभाग दावा करता रहा हो.
लेकिन जमीनी हकीकत इससे भिन्न है. चालू शैक्षणिक सत्र यानी 2015-16 का सत्र समाप्त होने में अब महज तीन-चार दिन बचा हुआ है. इस शैक्षणिक में राज्य सरकार ने बच्चों की सीखने की प्रवृत्ति को मूल्यांकन करने को लेकर कक्षा आठ के छात्र-छात्राओं की मूल्यांकन परीक्षा 29 व 30 मार्च को होगी. इस परीक्षा में करीब 45 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं सम्मिलित होंगे. जबकि पहली से सातवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं का सतत मूल्यांकन की प्रक्रिया समाप्त हो गयी है.
जिले में करीब 2000 के आसपास सरकारी प्रारंभिक विद्यालय है. चालू शैक्षणिक सत्र में बच्चों को मिलने वाली पाठ्य पुस्तक का पूरा सेट सभी छात्र-छात्राओं को नहीं मिला है. यहां तक कि जिन आठवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं की मूल्यांकन परीक्षा होनी है. उनमें से 35 प्रतिशत से अधिक छात्र-छात्राएं बगैर पढ़े ही मूल्यांकन परीक्षा में सम्मिलित होंगे. यह गौरतलब है कि राज्य सरकार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए कई तरह के पैमाना तय किये हैं. सरकार के नीतियों व स्थानीय विभागीय उदासीनता की वजह से जिले में प्रारंभिक शिक्षा दम तोड़ रही है.
35 फीसदी बच्चों को नहीं मिली किताबें : विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले में आठवीं कक्षा के करीब 35 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को चालू शैक्षणिक सत्र में पाठ्य पुस्तक नहीं मिला है. विभागीय रिपोर्ट की मानें तो जिले में आठवीं कक्षा के कुल छात्र-छात्राओं की संख्या 47247 है. जबकि चालू शैक्षणिक सत्र में मात्र 36006 पुस्तक प्राप्त हुआ है. पाठ्य-पुस्तक मिलने के मामले में दूसरी अन्य कक्षाओं के छात्र-छात्राओं की स्थिति कमोबेश ऐसी ही है. अब 29 व 30 मार्च को आठवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं की परीक्षा होनी है. हालांकि यह परीक्षा महज औपचारिकता भर है.

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