कृषि के साथ मधुमक्खी पालन कर अपना भविष्य संवार सकते है किसान
कृषि के साथ मधुमक्खी पालन कर अपना भविष्य संवार सकते है किसान
डंडखोरा प्रखंड के किसान भवन के सभागार में शुक्रवार को प्रखंड स्तरीय कर्मशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत तेलहन फसल के साथ मधुमक्खी पालन विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक पंकज कुमार एवं नोडल कृषि समन्वयक अभिनंदन कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कृषि वैज्ञानिक पंकज कुमार ने कहा कि बिहार में उत्पादित लीची शहद की मांग देश-विदेश में अधिक है. इस शहद का रंग गंध स्वाद आकर्षक है. बिहार में लीची, सरसों, सहजन, जामुन, सूरजमुखी एवं मूंग का शहद मिलता है. बिहार में इटालियन मधुमक्खी का पालन बडे स्तर पर किया जा रहा है. शहद के अतिरिक्त इससे मोम, मोनविष, राज अवलाहे, पराग, मधुमक्खी गोंद इत्यादि बहुमूल्य एवं पौष्टिक पदार्थ प्राप्त होते है. उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मधुमक्खी पालन शुरू करने से पहले किसी सरकारी संस्था से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त के लेना चाहिए तथा व्यवसाय पांच से 10 बॉक्सो से शुरू करनी चाहिए. लीची सरसों तोरिया, राई, सूरजमुखी इत्यादि फसलों के बगल में मधुमक्खी बॉक्स को रखे. बरसात के मौसम में शत्रु एवं बीमारी का आक्रमण अधिक होता है. उससे बचाने की जरूरत है. इस मौके पर सहायक तकनीकी प्रबंधक सुभाष सुभाष कुमार झा, लेखपाल रवि रंजन, डाटा इंट्री ऑपरेटर चंदन कुमार, किसान सलाहकार अशोक कुमार यादव, शाहनवाज अहमद, तनवीर आलम, अमित कुमार, राम निरंजन कुमार, नंदकिशोर कुशवाहा, रणबीर कुमार महतो, सकुन यादव, जागेश्वर केवट, निरंजन मंडल, रेखा देवी, राजीव कुमार मंडल, शिवम कुमार, शिवचरण मंडल, मेघिया देवी, राजीव भगत, प्रकाश पोद्दार, सरस्वती कुमारी, देवंती, पूर्णिमा देवी, अशोक कुमार मंडल सहित बड़ी संख्या में कृषक मौजूद थे
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