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दो वर्ष से दवा की सप्लाई नहीं, एलोपैथिक दवा लिखते हैं जिले के आयुष चिकित्सक

कैसे सुधरे व्यवस्था . पदस्थापित हैं 26 चिकित्सक, पर नहीं मिलता है लोगों काे लाभ जिले में 2010 से सरकारी अस्पतालों में आयुष चिकित्सक हैं तैनात. विगत दो वर्षों से जिले में आयुष की दवाओं का आवंटन स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं किया गया है़ किशनगंज : किशनगंज जिले में आयुष चिकित्सा कि स्थिति ठीक नहीं. […]

कैसे सुधरे व्यवस्था . पदस्थापित हैं 26 चिकित्सक, पर नहीं मिलता है लोगों काे लाभ

जिले में 2010 से सरकारी अस्पतालों में आयुष चिकित्सक हैं तैनात. विगत दो वर्षों से जिले में आयुष की दवाओं का आवंटन स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं किया गया है़
किशनगंज : किशनगंज जिले में आयुष चिकित्सा कि स्थिति ठीक नहीं. यहां वर्ष 2010 से आयुष चिकित्सकों की पदस्थापना की गयी थी, पर आज तक यह व्यवस्था मजबूत नहीं हुई. यहां पर 25 आयुष चिकित्सक पदस्थापित है़ं इसमें में 16 आयुष काे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में पदास्थापित किया गया है, जबकि नौ चिकित्सक अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत है़ं दूसरी ओर जिले में पिछले दो वर्ष से दवा की आपूर्ति नहीं की गयी है. इस वजह से पदस्थापित चिकित्सक भी पूरा काम नहीं कर पा रहे.
सनद रहे कि वर्तमान केंद्र सरकार ने आयुष को काफी गंभीरता से लिए और इसके लिए देश में आयुष निदेशालय की भी स्थापना की गयी, पर यह व्यवस्था जमीन पर नहीं उतारी जा सकी. इस कारण इसकी सुविधा लोगों को नहीं मिल रही और आयुष चिकित्सक भी आयुर्वेद की जगह ऐलोपैथिक दवा लिख रहे हैं. स्थिति यह है कि देसी चिकित्सा पद्धति सरकार की उदासीनता के कारण दम तोड़ती दिख रही है़ प्राचीन काल से आर्युवेदिक, यूनानी व होम्योपैथिक पद्धतियों से रेागों का उपचार होता आया है़ जिले में आयुष चिकित्सक कार्यरत रहने के बावजूद आम लोगों को अंग्रेजी दवाओं का सहारा लेना पड़ता है़
जिले के सरकारी अस्पतालों में आयुष चिकित्सक बहाल है. विगत दो वर्षों से जिले में आयुष की दवाओं का आवंटन स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं किया गया है़ आयुष चिकित्सा फ्लॉप साबित हो रहा है़ सिविल सर्जन डाॅ परशुराम प्रसाद ने बताया कि जिले में 25 आयुष चिकित्सक कार्यरत है़ जिसमें 16 आयुष चिकित्सक राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में कार्यरत है़ जबकि 9 आयुष चिकित्सक अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत है़ कब हुई आयुष चिकित्सक की बहाली
आयुष चिकित्सकों की बहाली 2010 में हुई थी़ उसके बाद 2015 में संविदा पर आयुष चिकित्सक बहाल किये गये़ 2015 में बहाल चिकित्सक राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में कार्यरत है़ं
क्या कहते हैं आयुष चिकित्सक
जिले में कार्यरत कई आयुष चिकित्सक भी चाहते हैं कि होम्योपैथ, आयुर्वेद व यूनानी दवाओं का आवंटन सरकारी अस्पतालों में हो़ 3-4 वर्ष तक स्वास्थ्य विभाग व सरकार ने दवाओं का आवंटन किया था़ लेकिन नवम्बर 2015 से होम्योपैथ की दवाओं की आपूर्ति बंद है़ आयुष चिकित्सकों ने माना कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आयुष पद्धति पर आज भी भरोसा करते है़ं
सरकारी स्तर पर दवा उपलब्ध नहीं रहने से परेशानी तो होती है़ मालूम हो कि आयुष चिकित्सक को बढ़ावा से देसी चिकित्सा को बढ़ावा देने का उद्देश्य अधर में लटका दिख रहा है़ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी आयुर्वेद व होम्योपैथ चिकित्सा पर भरोसा है़ जिले के करीब 85 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में बसती है़
Prabhat Khabar Digital Desk
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