जीत से किशनगंज सीट पर एआइएमआइएम को मिली संजीवनी
तभी तो लगातार मिल रही हार के बाद भी इस बार अभूतपूर्व सफलता के साथ यह सीट निकालने में पार्टी कामयाब रही.विपरीत परिस्थितियों में भी किशनगंज सीट ही एआईएमआईएम के लिए संजीवनी साबित हुई.पार्टी के नए चेहरे कमरुल होदा ने पार्टी का यहां खाता खुलवाया.और कांग्रेस महागठबंधन के उम्मीदवार सईदा बानो को करारी हार के […]
तभी तो लगातार मिल रही हार के बाद भी इस बार अभूतपूर्व सफलता के साथ यह सीट निकालने में पार्टी कामयाब रही.विपरीत परिस्थितियों में भी किशनगंज सीट ही एआईएमआईएम के लिए संजीवनी साबित हुई.पार्टी के नए चेहरे कमरुल होदा ने पार्टी का यहां खाता खुलवाया.और कांग्रेस महागठबंधन के उम्मीदवार सईदा बानो को करारी हार के साथ ही तीसरे नंबर पर ही संतोष करना पड़ा.
विश्लेषकों के अनुमान को धत्ता बताकर एआईएमआईएम ने उत्तर भारत और खासकर हिंदी पट्टी में इकलौती जीत हासिल की.इस बार जनता राष्ट्रीय दलों को अलग-थलग करते हुए वोट किया. टिकट वितरण में हुई खींचतान के बाद अंतिम समय पर कमरुल होदा को टिकट मिला उनके सहयोगी बताते हैं कि चुनाव प्रचार के लिये मात्र दो सप्ताह का समय मिला.
लेकिन वे कम समय मे भी पूरे क्षेत्र को कवर करने में सफल रहे.कांग्रेस के परंपरागत गढ़ किशनगंज में सेंध लगाकर प्रदेश में पार्टी का खाता खुलवाने वाले कमरुल होदा और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान का सियासी कद बहुत बढ़ा दिया है. मेहनत के बलबूते मिली जीत से सियासत में इनदोनों की भूमिका भी अहम बना दी. है.
क्योंकि एक साल के भीतर ही पूरे प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में एआईएमआईएम सीमावर्ती क्षेत सहित प्रदेश में भी पांव फैलाने की कोशिश करेगी.इस चुनाव में पार्टी सुप्रीमों असदुद्दीन ओवैसी प्रचार में भी नहीं आये.अप्रैल में हुए लोकसभा चुनाव में जहां तीसरे नंबर पर रहने वाली पार्टी ने मात्र छह महीने के भीतर ही पूरे समीकरण का पासा पलट दिया.