नफरत को दहन करने का त्योहार है होली : डा दिलीप

होलिका दहन के साथ-साथ शराब से बिगड़ रहे समाज को बचाने का संकल्प लें... किशनगंज : ऋतुओं में बसंत का फूलों में गुलाब का और रसों में श्रृंगार का जो महत्व है, वहीं स्थान त्योहारों में होली का है. मात्र यह एक त्योहार है जिसमें बसंत की सुषमा गुलाब की खुश्बू और श्रृंगार की मादकता […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | March 23, 2016 6:06 AM

होलिका दहन के साथ-साथ शराब से बिगड़ रहे समाज को बचाने का संकल्प लें

किशनगंज : ऋतुओं में बसंत का फूलों में गुलाब का और रसों में श्रृंगार का जो महत्व है, वहीं स्थान त्योहारों में होली का है. मात्र यह एक त्योहार है जिसमें बसंत की सुषमा गुलाब की खुश्बू और श्रृंगार की मादकता की अपूर्व संयोग है. ये बातें होली के पूर्व संध्या में विधान पार्षद सह एमजीएम मेडिकल कालेज के निदेशक डा दिलीप कुमार जायसवाल ने कही. वे मंगलवार को अपने आवास में पत्रकारों से मुखातिब थे.उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ढेर सारे पर्व त्योहार हैं.
लेकिन होली एक ऐसा पर्व है, जो सबको एक रंग के रंगने की कोशिश करता था. लेकिन आज होली हाईटेक हो गया है. होली फेसबुक, व्हाटसएप पर मैसेज से खेला जा रहा है. लोग रंग व अबीर से बचना चाहते हैं क्योंकि कुछ लोगों ने समाज में होली को विकृत रूप दे दिया है. अब न वह ढोलक की थाप है और न ही बिरहा की तान. खत्म हो रहे इस होली पर्व का फिर से जमीन से जोड़ने की जरूरत है. यह हमारा, आपका और होली का राष्ट्रीय चरित्र होगा.
डा जायसवाल ने कहा कि होली का त्योहार के परंपरा का निर्वहन करते हुए हमें शांति भाई चारा प्रेम के साथ-साथ स्वच्छ, सुंदर, समृद्ध, स्वस्थ, शिक्षित किशनगंज बनाने के दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए. डा जायसवाल ने किशनगंजवासियों को होली की शुभकामनाएं दी.
श्री जायसवाल ने कहा कि होलिका दहन में जलाना है नफरत हो. होली शांति व सद्भाव का त्योहार है. उन्होंने कहा कि होली पर्व में सबसे बुरा चलन शराब का है. सरकार के साथ-साथ समाज के हर वर्ग, समुदाय को मद्य निषेध समाज बनाने में सहयोग करना चाहिए. आपसी भाईचारे में त्योहार मनाएं.
होलिका दहन के साथ-साथ शराब से बिगड़ रहे समाज को बचाने का संकल्प लें.