फिटनेस जांच के बगैर धड़ल्ले से चल रहे हैं खटारा वाहन

लखीसराय : जिला मुख्यालय सहित जिला अंतर्गत विभिन्न पथों पर दौड़ लगा रहे अनफिट वाहन लोगों का फिटनेस बिगाड़ रहे हैं. जहरीला धुंआ उगलते इन छोटे-बड़े वाहनों की स्थिति यह है कि शहर के व्यस्ततम मार्ग पर पैदल चलनेवालों को भी इससे परेशानी होती है. कहीं भी यातयात पुलिस या परिवहन विभाग के पदाधिकारी इन […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

लखीसराय : जिला मुख्यालय सहित जिला अंतर्गत विभिन्न पथों पर दौड़ लगा रहे अनफिट वाहन लोगों का फिटनेस बिगाड़ रहे हैं. जहरीला धुंआ उगलते इन छोटे-बड़े वाहनों की स्थिति यह है कि शहर के व्यस्ततम मार्ग पर पैदल चलनेवालों को भी इससे परेशानी होती है.

कहीं भी यातयात पुलिस या परिवहन विभाग के पदाधिकारी इन जहर उगल रहे वाहनों की फिटनेस चेक कर कार्रवाई करते नजर नहीं आते. इस तरह के वाहन लोगों को सांस संबंधी रोग बांट रहे हैं. कागजों पर ही वाहनों का फिटनेस चेक हो रहा है. परिवहन विभाग के पास अनफिट वाहनों का कोई आंकड़ा भी नहीं है. जिले में 60 फीसदी से अधिक व्यावसायिक वाहन बिना फिटनेस व प्रदूषण जांच के हर दिन सड़कों पर प्रदूषण फैला रहा है.

हाल के दिनों में परिवहन विभाग के चौकस होने से ऐसे वाहनों पर आंशिक लगाम लगा है. परंतु विभागीय दिशा निर्देश व परिवहन कानून का अनुपालन अब भी बड़ी चुनौती है. खासकर पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए व्यावसायिक व निजी वाहनों का एमसीआइ व निजी जांच केंद्रों द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र के कागजी दावे और जमीनी हकीकत में काफी अंतर है.जुगाड़ गाड़ी से हो रहा प्रदूषण शहर भर में बैखौफ जुगाड़ गाड़ी का परिचालन हो रहा है.

जुगाड़ गाड़ी से निकलने वाली धुआं लोगों को बीमार कर रहा है. शहर की सड़कों पर वाहनों के परिचालन में फिटनेस व प्रदूषण के मानकों की पूरी तरह अनदेखी हो रही है. सड़क पर चल रहे कंडम वाहन की पकड़-धकड़ कर उनसे जुर्माना नहीं वसूला जा रहा है. जिले की सड़कों पर खटारा वाहनों का परिचालन आम बातजिले की सड़कों पर यात्री सवारी वाहनों जीप, सवारी, मैजिक, ऑटो, पिकअप वैन आदि यात्री वाहनों का परिचालन हो रहा है.

उनमें से अधिकांश खटारा हो चुका है व सड़कों पर चलने योग्य नहीं हैं. ऐसे वाहन अक्सर दुर्घटना का कारण बनते हैं. वाहन चालकों को ट्रैफिक सिस्टम का भी सही तरीके से ज्ञान नहीं होता. फिटनेस में एमसीआइ की भूमिका महत्वपूर्णगाडि़यों के फिटनेस देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका एमसीआइ का है. इनके बिना किसी को फिटनेस का प्रमाण पत्र नहीं मिल सकता. प्राईवेट से फिटनेस लेने के बाद भी उनके सर्टिफिकेट पर एमसीआइ की कांउटर साईन आवश्यक है.

कहते हैं जिला परिवहन पदाधिकारीडीटओ आलोक कुमार ने बताया कि वाहन जांच के क्रम में जिन गाड़ियों की जांच पड़ताल की जाती है उसका फिटनेस भी जांच किया जाता है. ऐसे फिटनेस जांच की जबावदेही एमसीआइ की है. जिला में स्थायी एमसीआइ नहीं होते की वजह से परेशानी बनी हुई है. अभियान चलाकर लगातार वाहनों की जांच की जाती है.

जुर्माना पर एक नजरफिटनेस जांच नहीं होने पर दो से पांच हजार रुपयेप्रदूषण जांच नही होने पर एक हजारबिना लाईसेंस के वाहन चलाने पर एक हजार के अलावे तीन माह की कैदयह है नियम व्यवसायिक वाहन खरीद के बाद दो साल तक फिटनेस मुक्त इसके बाद हर साल फिटनेस जांच जरूरीनिजी वाहन खरीदने के बाद दोबारा रजिस्ट्रेशन रिनुअल कराने के वक्त फिटनेस जरूरी है.

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