दुखद . जिले में फुल लोड बिजली उपलब्धता के बावजूद बनी हुई है परेशानी
मेंटेनेंस में उलझी विद्युत आपूर्ति... जिले में कभी मेंटेनेंस के नाम पर ताे कभी लोकल फॉल्ट के कारण िबजली के काटे जाने का सिलसिला जारी है. जबिक जिले में फुल लोड बिजली उपलब्ध है. वहीं दूसरी ओर कई मुहल्लों में लकड़ी के खंभे पर लटके िबजली के तार से हादसे की आशंका बनी रहती है. […]
मेंटेनेंस में उलझी विद्युत आपूर्ति
जिले में कभी मेंटेनेंस के नाम पर ताे कभी लोकल फॉल्ट के कारण िबजली के काटे जाने का सिलसिला जारी है. जबिक जिले में फुल लोड बिजली उपलब्ध है. वहीं दूसरी ओर कई मुहल्लों में लकड़ी के खंभे पर लटके िबजली के तार से हादसे की आशंका बनी रहती है.
लखीसराय : जिले भर में फुल लोड बिजली उपलब्धता के बाबजूद 24 घंटे बिजली नहीं मिल पा रही है. कभी मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली काट ली जाती है तो कभी लोकल फाॅल्ट के कारण परेशानी बनी रहती है. इन दिनों तार बदलने के नाम पर हर रोज बिजली बाधित रहने की वजह से उपभोक्ता परेशान हैं. विद्युत आधारित व्यापार व उद्योग-धंधे पर इसका असर देखा जा रहा है.
शहर के लोगों का कहना है कि मेंटेनेंस कार्य की गति धीमी होने की वजह से परेशानी हो रही है. गरमी दस्तक दे रही है. अगर बिजली की आंखमिचौली इसी तरह रही तो आनेवाले दिनों में परेशानी और बढ़ेगी.
ग्रामीण इलाकों की स्थिति और भी बदतर
ग्रामीण इलाके में आज भी जर्जर तार व पोल के सहारे विद्युत आपूर्ति की जा रही है. कहीं लकड़ी के खंभे के सहारे विद्युत आपूर्ति की जा रही है तो कहीं तार की गुणवत्ता निम्न होने की वजह से अक्सर तार टूटने का खतरा बना रहता है. सूर्यगढ़ा प्रखंड के अलीनगर पंचायत में पासवान टोला, जकड़पुरा पंचायत के रविदास टोला सहित कई ऐसे टोले हैं जहां बांस या जर्जर लकड़ी के पोल के सहारे आज भी विद्युत आपूर्ति हो रही है.
विभाग इन जर्जर पोल व तार को बदलने की दिशा में कदम नहीं उठा रही. सूर्यगढ़ा बाजार में 440 वोल्ट तार की गुणवत्ता निम्न होने की वजह से अक्सर यह टूटकर गिरती है. पुरानी बाजार सूर्यगढ़ा में जर्जर तार को बदलने की मांग स्थानीय लोगों द्वारा लंबे समय से की जा रही है.
मेंटेनेंस के अभाव के कारण होती है परेशानी
अधिकतर इलाकों में मानव बल की कमी के कारण मेंटेनेंस का कार्य ग्रामीण स्वंय करते हैं. ब्रेक डाउन की स्थिति में उसे ठीक करने में 10 से 12 घंटे का समय लगना आम बात है. ट्रांसफार्मर व पोल पर आयी त्रुटि से विभागीय कर्मी को कोई लेना-देना नहीं होता. इसके लिए उपभोक्ताओं को प्राइवेट बिजली मिस्त्री का सहारा लेना होता है. उपभोक्ताओं को इसके लिए दो सौ से तीन सौ रुपया तक चुकाना होता है. ग्रामीण इलाके में कई जगह तार जमीन के काफी करीब होने की वजह से हादसे की आशंका बनी होती है.
क्या कहते हैं कार्यपालक अभियंता
कार्यपालक अभियंता के मुताबिक विद्युत व्यवस्था को तेजी से दुरुस्त किया जा रहा है. जहां-तहां जर्जर तारों को बदलने का कार्य भी हो रहा है. जिससे उस एरिया की विद्युत आपूर्ति प्रभावित हो रही है. कार्य को शीघ्र पूरा कर लिया जायेगा.
