खरीद में गड़बड़ी, भुगतान पर रोक

बाढ़ बचाव कार्य . जून में ही 21 नावों के लिए तीन फर्म का किया गया था चयन निर्धारित तिथि 18 अगस्त तक तीन अंचल के चिह्नित घाट तक आपूर्ति की शर्त के साथ तीनों फर्म की निविदा को जिला प्रशासन ने किया था स्वीकृत पटना के तीनों फर्म ने 21 नाव के बदले 15 […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

बाढ़ बचाव कार्य . जून में ही 21 नावों के लिए तीन फर्म का किया गया था चयन

निर्धारित तिथि 18 अगस्त तक तीन अंचल के चिह्नित घाट तक आपूर्ति की शर्त के साथ तीनों फर्म की निविदा को जिला प्रशासन ने किया
था स्वीकृत
पटना के तीनों फर्म ने 21 नाव के बदले 15 नाव की ही आपूर्ति की थी, चौसा सीओ ने पत्र लिख कर आपदा प्रभारी पदाधिकारी को नाव के क्षतिग्रस्त होने की दी जानकारी
क्षतिग्रस्त होने के कारण नावों को बाढ़ के दौरान नहीं किया जा सका उपयोग, मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम ने तीनों आपूर्तिकर्ता फर्म के भुगतान पर लगायी रोक
मधेपुरा : वर्तमान वर्ष बाढ़ से पहले जिला प्रशासन द्वारा जिले के कई प्रखंडों के लिये नाव खरीदगी के मामले में गड़बड़ी उजागर होने के बाद डीएम ने नाव आपूर्तिकर्ता का भुगतान तत्काल रोकने का आदेश दिया है. वहीं इस मामले के सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों में खलबली मच गयी है. नयी नाव की जगह पर पुरानी और क्षतिग्रस्त नाव की आपूर्ति कर दी गयी. पदाधिकारियों और ठेकेदार में सांठगांठ से जनता की गाढ़ी कमाई के दुरूपयोग के प्रयास यह मामला अकेला नहीं है. अगर सरकारी खरीद की तरीके से जांच की जाये तो ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं.
क्या है मामला: समाहरणालय आपदा प्रबंधन शाखा ने इस वर्ष बारिश के दौरान जिले के मुरलीगंज, चौसा एवं आलमनगर अंचल में आने वाले संभावित बाढ़ को देखते हुए बाढ़ से प्रभावित होने वाले लोगों को उंचे स्थान तक ले जाने के लिये नाव की खरीदगी के लिये निविदा प्रकाशन के बाद नाव आपूर्ति के लिये चिन्हित तीन फर्म को सर्शत नाव आपूर्ति का आदेश दिया. एक लाख दस हजार की दर से सखुआ की बड़ी नाव एवं नब्बे हजार की दर से सखुआ की छोटी नाव आपूर्ति करने का कहा गया.
कुल 21 नाव की आपूर्ति के लिये 18 अगस्त तक संबंधित अंचल के चिन्हित घाट तक करने का समय निर्धारित किया गया. हालांकि 21 के बदले कुल 12 बड़ी और तीन छोटी नाव की आपूर्ति तो की गयी लेकिन ये नाव किसी काम की नहीं थी. बुरी तरह क्षतिग्रस्त इन नावों का परिचालन संभव नहीं हो सका. जानकारों के अनुसार अंदर-अंदर भुगतान की तैयारी भी चल रही थी लेकिन डीएम की नजर में जैसे ही मामला आया उन्होंने भुगतान पर तत्काल रोक लगा दिया. इन नावों की एवज में जिला प्रशासन को 15 लाख का भुगतान करना था.
तीन फर्म ने की थी आपूर्ति: 28 जून को जिला क्रय समिति के समक्ष खोली गयी निविदा में तीन फर्म का एक ही दर मिलने के बाद क्रय समिति ने तय किया कि चूंकि आपूर्ति की अवधि कम है इसलिये तीनों फर्म को ठेका दे दिया जाये तो निर्धारित समय 18 अगस्त तक आपूर्ति संभव हो सकेगी. ये फर्म थीं मे तिरूमाला एसोसिएट्स पटना, भेराइटी व्यापार प्रा लि पटना और पारस इंटरप्राइजेज पटना. प्रत्येक फर्म को पांच बड़ी और दो छोटी नाव की आपूर्ति करना था.
चौसा सीओ ने पत्र लिख कर नाव का हाल बताया : आपूर्ति करने वाली फर्म ने निर्धारित स्थल पर नाव की आपूर्ति कर दी. वहीं नाव की स्थिति को देखते हुए चौसा के सीओ ने 19 अक्टूबर को आपदा प्रबंधन विभाग के प्रभारी पदाधिकारी को पत्र लिख की नाव की जर्जर स्थिति की जानकारी दी. उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि उन्हें श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी शंकरपुर मनोज प्रभाकर ने आठ क्षतिग्रस्त नाव हस्तगत कराया. नाव की स्थिति के बारे में ठेकेदार ने एक सप्ताह के भीतर सभी नावों की मरम्मत कर चालू अवस्था में लाने की बात कही. लेकिन अब तक मरम्मत नहीं कराया गया है और नाव चलने की स्थिति में नहीं है.
जिले के चौसा अंचल के फुलौत में लोहापुल घाट पर बेकार पड़ी क्षतिग्रस्त नावें.
सीओ के प्रमाण पत्र के बाद ही होना था भुगतान
जिलाधिकारी ने समाहरणालय आपदा प्रबंधन के पत्रांक 682 एवं पत्रांक 675 के जरिये क्रमश: मुरलीगंज सीओ एवं आलमनगर व चौसा सीओ को पत्र लिख कर नाव की आपूर्ति के बाद ट्रैक्टर संख्या के साथ नाव भेजने की बात कही. मुरलीगंज में एक बड़ी एवं एक छोटी नाव भेजी गयी. वहीं छह बड़ी एवं दो छोटी नाव चौसा अंचल एवं पांच बड़ी नाव आलमनगर अंचल को भेजी गयी. तीनों अंचल में नाव प्राप्त कराने के लिये श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी शंकरपुर मनोज प्रभाकर को प्राधिकृत किया गया. पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि नाव में गहनी करने के बाद संबंधित अंचलाधिकारियों से इस आशय का प्रमाण पत्र देने के बाद ही नाव का भुगतान किया जायेगा.
अनुत्तरित हैं कुछ सवाल
तीनो फर्म को सशर्त नाव आपूर्ति का ठेका दिया गया था. इन शर्तों के अनुसार फर्मों को नाव की आपूर्ति से पहले जिला आपदा प्रबंधन शाखा में एकरारनामा प्रस्तुत करना था कि वे निर्धारित तिथि 18 अगस्त तक सभी नाव की आपूर्ति करेंगे. आपूर्ति के बाद आपदा प्रभारी पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित त्रिसदस्यीय जांच दल नाव की जांच करेगी तभी आपूर्ति ली जायेगी. नाव की आपूर्ति चिन्हित घाट तक करना था. आपूर्ति किये गये नाव के विपत्र का भुगतान जांच दल के प्रमाणपत्र दिये जाने के बाद ही किया जायेगा.
ऐसी अन्य कई शर्तों के पूरा होने पर ही भुगतान किया जाना था. आखिर जांच की इन आवश्यक बिंदुओं की अनदेखी करते हुए ये क्षतिग्रस्त नाव निर्धारित स्थल तक पहुंचा दी गयी. इन्हीं सवालों के जवाब में सारी गड़बड़ियों के राज छुपे हैं. बहरहाल डीएम ने भुगतान पर रोक तो लगा दी है आगे इस मामले की जांच में सारे तथ्य निकल कर सामने आने की संभावना है.
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