धरने पर बैठे चिकित्सक, जताया विरोध

मांग. चिकित्सीय पेशे की स्वायत्तता बरकरार रखे सरकार : आइएमए क्लिनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट का विरोध करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मधेपुरा इकाई ने चरणबद्ध आंदोलन के तहत सत्याग्रह किया. चिकित्सकों ने प्रधानमंत्री के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन मधेपुरा : क्लिनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट का विरोध करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मधेपुरा इकाई ने […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

मांग. चिकित्सीय पेशे की स्वायत्तता बरकरार रखे सरकार : आइएमए

क्लिनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट का विरोध करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मधेपुरा इकाई ने चरणबद्ध आंदोलन के तहत सत्याग्रह किया.
चिकित्सकों ने प्रधानमंत्री के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन
मधेपुरा : क्लिनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट का विरोध करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मधेपुरा इकाई ने अपने चरणबद्ध आंदोलन के तहत बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित कर्पूरी चौक पर सत्याग्रह किया. सुबह करीब दस बजे से कर्पूरी चौक पर चिकित्सक पहुंच गये और उन्होंने अपना विरोध जताया. सत्याग्रह के दौरान धरने पर बैठे आइएमए मधेपुरा के सचिव डाॅ डीके सिंह ने कहा कि यह बिल देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. इसके लागू होने से स्वास्थ्य सेवा रसातल में चली जायेगी.
आइएमए के अध्यक्ष डाॅ मिथिलेश कुमार ने बताया कि आइएमए केंद्र सरकार से एनएमसी की योजना समाप्त करने, चिकित्सीय पेशे की स्वायत्तता बरकरार रखते हुए इंडियन मेडिकल काउंसिल अधिनियम को संशोधित करने, चिकित्सक और अस्पतालों को हिंसा से बचाने के लिए केंद्रीय अधिनियम लाने की मांग करता है. आइएमए दुनिया में आधुनिक चिकित्सा पद्धति के भारतीय चिकित्सकों का सबसे बड़ा संघ है. यह समय-समय पर भारत एवं राज्य सरकार की स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन में पुरजोर भागीदारी करता है. धरना के बाद आइएमए के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा.
चिकित्सकों ने कहा कि प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेकनिक-पीएनडीटी एक्ट के कुछ नियमों में बदलाव किया जाये. पीएनडीटी एक्ट के तहत केवल कन्या भ्रूण हत्या के लिए सजा का प्रावधान हो, न कि दस्तावेज संबंधी गलतियों के लिए. चिकित्सकों ने आधुनिक और स्वदेशी चिकित्सा पद्धति के एकीकरण योजना रद्द करने की मांग भी की. उन्होंने कहा कि नया कानून जन विरोधी है.
इस कानून से अनेक अस्पताल बंद हो जायेंगे तथा चिकित्सा सेवा और महंगी हो जायेगी. कानून में प्रत्येक चिकित्सा संस्थान को सरकार से पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा और पंजीकृत जगह पर चिकित्सा प्रदान करना गैर कानूनी होगा. इसके कारण किसी प्रकार की चिकित्सा संबंधी कैंप लगाना असंभव होगा. चिकित्सकों ने कहा कि जिस तरह से वर्तमान में निजी अस्पतालों के लिए कानून बनाया गया है उससे नर्सों की कमी हो जायेगी. इसकी वजह से हर नर्सिंग होम का पंजीकरण कराना मुश्किल होगा. चिकित्सकों ने पुराने एक्ट को बहाल कर नये एक्ट में संशोधन किये जाने जैसी छह सूत्रीय मांगें रखी हैं.
चिकित्सकों ने कहा कि सरकार एमसीआइ को समाप्त कर इसके बदले एनएमसी लाने पर अामादा है. सरकार को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह नेशनल मेडिकल काउंसिल लाने के बदले समस्याओं में सुधार करना चाहिए न कि जनहित में बने एक बेहतर कानून को ही बदल देना चाहिए. डाॅक्टरों का कहना था कि एनएमसी के लागू होने से संविधान की धारा 16बी भी खत्म हो जायेगी, जिसके तहत आधुनिक चिकित्सा के लिए एमबीबीएस डिग्री होना आवश्यक था. इसके लागू होने के बाद आयुर्वेद, होमियोपैथ और यूनानी चिकित्सकों को आधुनिक चिकित्सा में रजिस्ट्रेशन करवाने की छूट होगी.
सत्याग्रह करने वालों में डाॅ अरुण कुमार मंडल, डाॅ पी टूटी, डाॅ सरोज सिंह, डाॅ नायडू कुमारी, डाॅ सीताराम यादव, डाॅ सच्चिदानंद यादव, डाॅ उदित राजा, डाॅ बीएन भारती, डाॅ आरके पप्पू, डाॅ एलके लक्ष्मण, डाॅ आलोक निरंजन, डाॅ अंजनि कुमार, डाॅ एचएन प्रसाद, डाॅ संतोष कुमार, डाॅ सुमन कुमार आदि शामिल थे.
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