कपसिया पुल की बाट जोह रहा आलमनगर
उदासीनता . 70 के दशक में हुई थी घोषणाप्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरीSpies In Mauryan Dynasty : मौर्य काल से ही चल रही है ‘रेकी’ की परंपरा, आज हो तो देश में मच जाता है बवालRajiv Gauba : पटना के सरकारी स्कूल से राजीव गौबा ने की थी पढ़ाई अब बने नीति आयोग के सदस्यUPS: […]
उदासीनता . 70 के दशक में हुई थी घोषणा
कपसिया पुल बनने से आलमनगर, बिहारीगंज, ग्वालपाड़ा व खगड़िया जिला के बेलदौर प्रखंड की लगभग 7 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा. यही नहीं राजधानी पटना की दूरी 100 किमी घट जायेगी. लेकिन, 70 के दशक में हुई घोषणा के बाद अब तक इस पुल का निर्माण नहीं हो सका, जिससे लोगों को भारी परेशानी हो रही है.
आलमनगर : जिले के आलमनगर प्रखंड के आम जनता व बुद्धिजीवियों द्वारा वर्षों से चिर-परिचित लंबित कपसिया घाट में कोसी नदी पर पुल बनाने की मांग एक बार फिर से जोड़ पकड़ने लगी हैं. 70 के दशक से ही इस पुल की मांग हो रही है. चौसा में विजयघाट पुल की निर्माण कार्य पूरा होने के बाद क्षेत्र के लोगों में एक बार फिर आशा जगी है. गौरतलब है कि 70 के दशक में ही तत्कालीन पथ-निर्माण मंत्री सह स्थानीय विधायक स्व विद्याकर कवि के द्वारा आलमनगर से कपसिया घाट तक क्राइम कंट्रोल रोड एवं कोसी नदी पर पुल की घोषणा की गयी थी. क्राइम कंट्रोल रोड का निर्माण तो हो गया.
तत्कालीन सरकार द्वारा पुल को मूर्त रूप देने के लिए सर्वेक्षण भी किया गया. परंतु सर्वेक्षण की फाइल ठंडे बस्ते में चली गयी. मधेपुरा जिला, खगडि़या जिला एवं भागलपुर जिला के सीमा पर अवस्थित इस पुल के निर्माण से आलमनगर, बिहारीगंज, ग्वालपाड़ा एवं खगडि़या जिला के बेलदौर प्रखंड की लगभग 7 लाख लोगों को आवागमन की सुविधा होगी एवं राजधानी जाने में लगभग 100 किलोमीटर की यात्रा की बचत के साथ समय एवं परेशानी से बच जायेंगे.
इस क्षेत्र की जनता हर वर्ष कोसी की विकराल विभिषिका से त्रस्त रहती है एवं इस क्षेत्र के मेहनतकश किसान द्वारा उत्पादित अनाज जो आवागमन की सुविधा के अभाव में बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों में बेचने को अभिशप्त हैं. जदयू पूर्व प्रखंड अध्यक्ष राजेश्वर राय एवं समाज सेवी अखिलेश प्रसाद सिंह ने बताया कि इस पुल के निर्माण हो जाने से कपसिया घाट से जननायक कर्पूरी बांध तक पुल के बाद मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर एन एच 31 छतीसनगर में मिलती है. उन्होंने बताया कि कोसी नदी का मुहाना कपसिया घाट में छोटा होने से पुल की लागत भी कम आयेगी.
पूर्व में किया गया था अनशन . तीन वर्ष भी इस पुल की मांग को लेकर कपसिया के उस पार बिरबन्ना घाट पर दर्जनों लोगों ने एक सप्ताह तक आमरण अनशन किया था. जिसमें खगडि़या जिला के लोगों के साथ – साथ मधेपुरा जिला के कपसिया, सुखाड़, रतवारा एवं खापुर के हजारों लोगों ने शामिल होकर इस पुल के लिए मांग की थी. वहीं नेताओं के आश्वासन के बाद एक सप्ताह के उपरांत अनशन को समाप्त कराया गया था. परंतु इस दिशा में आज तक सरकार द्वारा घोषणा नहीं किये जाने से लोगों में फिर से आंदोलन करने का मन बनाया है.
कहते हैं स्थानीय लोग
राम लाल सिंह, रमावतार चौधरी ने बताया कि इस पुल के बन जाने से इस क्षेत्र का विकास में चार चांद लग जायेगी. क्योंकि डुमरी पुल भी बंद हो जाने से खगडि़या सहरसा एवं मधेपुरा के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है एवं आम लोगों की जेब यातायात समस्याओं से खाली करना पड़ रहा है. क्योंकि समान की ढुलाई की लागत बढ़ जाने से दैनिक उपयोगी चिजों सहित भवन निर्माण एवं अन्य चीज महेंगे दाम में खरीदना पड़ता है. अगर यह पुल बन गया होता तो
आज डूमरी पुल के क्षति ग्रस्त होने का खामियाजा इस क्षेत्र के लोगों को नहीं भुगतना पड़ता. स्थानीय रतवारा पंचायत के पूर्व मुखिया बीपीन शर्मा ने बताया कि इस पुल के बन जाने से इस क्षेत्र का आर्थिक विकास में अहम योगदान देने वाले मक्के की फसल के उत्पादन के बाद मंडियों में ले जाने में यहां के किसानों को भारी सुविधा होगी. इससे किसानों को मक्का का उचित मुल्य मिल पायेगा. क्योंकि यह क्षेत्र लगभग चार महीने आलमनगर प्रखंड मुख्यालय से सड़क विहीन हो जाती है. वहीं किसान अपने आनाज को औने पौने दाम में बेचेन को विवश होती है. क्योंकि हर साल यहां बाढ़ की त्रासदी लोगों को झेलना पड़ता है.