विषाक्त फल खाने से डेढ़ दर्जन लोग आक्रांत

पीिड़त. दस्त से बिगड़ने लगी हालत, पांच लोग रेफर बेनीपट्टी : प्रखंड क्षेत्र के चतरा डुमरा गांव में कटहल का विषाक्त फल खाने से तकरीबन डेढ़ दर्जन लोगों को डायरिया से आक्रांत हो जाने का मामला सामने आया है. जिसमें चार मरीजों की हालत नाजुक होने के कारण सदर अस्पताल मधुबनी के लिये रेफर कर […]

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पीिड़त. दस्त से बिगड़ने लगी हालत, पांच लोग रेफर

बेनीपट्टी : प्रखंड क्षेत्र के चतरा डुमरा गांव में कटहल का विषाक्त फल खाने से तकरीबन डेढ़ दर्जन लोगों को डायरिया से आक्रांत हो जाने का मामला सामने आया है. जिसमें चार मरीजों की हालत नाजुक होने के कारण सदर अस्पताल मधुबनी के लिये रेफर कर दिया गया है. मिली जानकारी के अनुसार डूमरा गांव निवासी के महादलित बस्ती में लोगों ने गुरुवार की शाम कटहल का फल खाया और शुक्रवार की शाम से सभी की हालत बिगड़ने लगी. पहले तो पेट में दर्द की शिकायत हुई फिर उल्टी और पतला पायखाना होने लगा. बस देखते ही देखते अधिकांश लोगों की हालत बिगड़ने लगी.
हालत बिगडते ही लोगों ने सभी मरीजों को बेनीपट्टी पीएचसी में भरती कराया. पीएचसी में भरती मरीजों में डूमरा गांव के जमेली राम के पुत्र सुजीत राम 8, ½ उनका दूसरा पुत्र सुधीर राम 12½, तीसरा पुत्र प्रवीण राम 14½, ललित राम की पत्नी पूनम देवी 20½, राम जुलूम राम की पत्नी मनतोरिया देवी 35, ½ जमेली राम की पुत्री खुख्बू कुमारी 6, ½ राम जुलूम राम की पुत्री आड़हुलिया कुमारी 12, ½ जगदेव राम का पुत्र अमृत राम ,10½ व अघनू राम का पुत्र मनोज कुमार राम 16½ शामिल थे.
जिनमें सुजीत राम, सुधीर राम, प्रवीण राम, खुश्बू कुमारी व मनतोरिया देवी की हालत नाजुक होते देख चिकित्सकों ने सदर अस्पताल मधुबनी के लिये रेफर कर दिया. वहीं चमेली राम ने बताया कि कटहल खरीदकर बाजार से लाया था और परिवार के सभी लोगों ने आपस में बांटकर उसका फल गुरुवार की शाम को खाया. शुक्रवार की शाम से बच्चों को पेट में दर्द होने शुरु हुए और फिर बुखार, उल्टी व पतला दस्त होने लगा. जितने लोगों ने फल को खाया था,
सभी एक के बाद एक डायरिया से आक्रांत होने लगे. वहीं उन्होंने बताया कि कुल नौ लोगों को पीएचसी में भरती कराया जा चुका है, जबकि शेष बचे अन्य लोगों का इलाज गांव के ही निजी क्लिनिक में चल रहा है. उधर गांव में डायरिया के फैलने की आशंका को लेकर लोग भयभीत हैं. इस संबंध में डायरिया के मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सक डा. पीएन झा ने कहा कि सभी लोग फूड प्वायजनिंग का शिकार हो चुके हैं, जिनमें पांच की हालत नाजुक हो चुकी थी. लिहाजा उन सभी को रेफर किया जा चुका है. शेष का इलाज चल रहा है. गांव में इसके संक्रमण से बचाव को लेकर कोई कैंप लगाये जाने के बारे में उन्होंने बताया कि अभी पीएचसी में भरती मरीजों का इलाज किया जा रहा है. आवश्यकता आने पर गांव में भी कैंप लगाये जाने की व्यवस्था की जायेगी. हालांकि पीएचसी में भरती मरीजों के परिजनों में घबराहट बढ़ जाने के कारण कई मरीजों को बिना चिकित्सक को बताये ही सदर अस्पताल के लिये ले जाये जाने की बात भी सामने आ रही है.
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