मधुबनी : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी की घोषणा को हर वर्ग के लोगों ने सराहना की है. हर तबके के लोगों में यह खुशी है कि अब उनके गांव में शराब पीकर हो हंगामा या परिवार में मारपीट की घटना कम हो जायेगी. खासकर उनलोगों में अधिक खुशी देखी जा रही है जिन्होंने गांव […]
ByPrabhat Khabar Digital Desk|
मधुबनी : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी की घोषणा को हर वर्ग के लोगों ने सराहना की है. हर तबके के लोगों में यह खुशी है कि अब उनके गांव में शराब पीकर हो हंगामा या परिवार में मारपीट की घटना कम हो जायेगी.
खासकर उनलोगों में अधिक खुशी देखी जा रही है जिन्होंने गांव पंचायत से शराब के खिलाफ अभियान चला कर गांव को नशा से मुक्त करने की पहल शुरू की थी. इस पहल के लिये परिहारपुर गांव का नाम जिले में सबसे अव्वल स्थान पर माना जाता है.
एक व्यक्ति ने इसके खिलाफ पहल शुरू की थी. जो देखते ही देखते एक कारवां का रूप अख्तियार कर लिया और पूरा गांव देखते ही देखते नशा से तौबा कर लिया. परिहारपुर गांव के रविंद्र झा जो पेशे से एक शिक्षक हैं,
ने वर्ष 16 दिसंबर 2012 में शराब उन्मूलन के दिशा में पहल शुरू किया. इसमें शुरूआती दौर में उन्हें खासे परेशानी हुई. नशा करने वालों की संख्या अधिक, इसका विरोध करने वालों की संख्या कम, पर रविंद्र झा ने हिम्मत नहीं हारी, एक मित्र को समझाते समझाते इन्होंने न सिर्फ नशा से दूर कर दिया बल्कि उनके वे मित्र खुद भी इनके नशा उन्मूलन के अभियान में शामिल हो गये जो कल तक नशा के आदी थे.
गांव की महिलाओं ने दिया सहयोग
नशा उन्मूलन अभियान का असर कुछ समय बाद ही सामने आया. इससे सबसे अधिक परिहारपुर और आस पास की महिलाएं प्रभावित हुई. उन्होंने रवींद्र के इस अभियान में खुलकर सहयोग देने को सामने आयी. महिलाएं सबसे अधिक शराब से होने वाले दुष्परिणाम से प्रभावित थी.
सो देखते ही देखते प्राय: हर घर से महिलाएं शराब के विरोध में सामने आ गयी. इसमें निम्न वर्गीय तबके की महिलाओं की संख्या अधिक थी. परिहापुर गावं अब शराब के खिलाफ आ चुका था. इस गांव में अब ना तो शराब बिकता था और न ही लोग शराब पीते देखे जाते थे. जो लोग शराब पीते दिखते उन्हें महिलाएं मारा पीटा करती थी.
निकली थी पैदल यात्रा
शराब के खिलाफ परिहारपुर, पिलखबार, खोईर सहित अन्य गांव की सैकड़ाें महिलाओं ने 31 जुलाई 2013 को पैदल यात्रा निकाली थी. जो गांव गांव जाकर लोगों से शराब से दूर रहने की नसीहते भी दे रही थी और शराब बेचने वालों को दंडित भी कर रही थी. कई कटघरों में बेचे जा रहे शराब को महिलाओं ने पानी में बहा दिया था.
इस पहल का असर यह हुआ कि अब लोग इन गांवों की महिलाओं को देखते ही शराब को फेंक कर दूर भागने लगे.
कई की हो चुकी है मौत
शराब पीने से कई लोगों की मौत हो चुकी है. वर्ष 2012 का अक्तूबर माह को लोग इतिहास के पन्नों में काले दिवस के रूप में याद करते हैं. इसी माह के 12 तारीख को मधुबनी कांड हुआ थी. जहां लाखों की परिसंपत्ति को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया था. इस आग की लपटें अभी शांत भी नहीं हुई थी.
लोग इसे भूलने की कोशिश करते हुए नये साल 2013 के स्वागत में जुटे थे कि अचानक 31 दिसंबर की रात चकदह गांव में कथित तौर पर शराब पीने से करीब एक दर्जन लोगों के मरने की समाचार ने लोगों को अंदर तक हिला कर रख दिया था. प्रशासन भी परेशान हो चुका था. तत्कालीन जिला पदाधिकारी लोकेश कुमार सिंह ने इस घटना को बीमारी से हुई मौत बताया था. पर हकीकत हर कोई जानता था.
दूसरे गांव तक पहुंचा अभियान
जब परिहारपुर गांव में शराबबंदी की पहल सार्थक हुई तो रवींद्र के नेतृत्व में लोग अन्य गांवों में भी अभियान चलाना शुरू कर दिया. आज आलम यह है कि करीब 40 गांव में नशा उन्मूलन अभियान परिहारपुर के नेतृत्व में शराब बंदी अभियान चल रहा है. कई गांवों के लोगों ने शराब छोड़ कर अपनी जिंदगी को सही दिशा में ले आया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अभियान को रवींद्र झा ने सराहना किया है. कहा है कि सीएम नीतीश कुमार की यह पहल समाज को विकसित करेगा. यह पहल पूर्व में ही हो जानी चाहिए थी.
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