ओपीडी में नहीं बैठे डॉक्टर, मरीज हुए परेशान

शुक्रवार को दूसरे दिन भी सदर अस्पताल से लेकर एपीएचसी तक ओपीडी कार्य बहिष्कार जारी रहा.

By DIGVIJAY SINGH | March 28, 2025 10:20 PM

डॉक्टरों का ओपीडी कार्य बहिष्कार दूसरे दिन जारी रहने से मरीजों की बढ़ी परेशानी

आयुष एवं दंत चिकित्सक संघ ने भी हड़ताली चिकित्सकों को दिया समर्थन

सीएस ने दूसरे दिन भी लिया अस्पताल का जायजा

मधुबनी . बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के राज्य स्तरीय निर्णय के आलोक में चिकित्सकों के बायोमेट्रिक उपस्थित बनाने के निर्णय पर रोक लगाने सहित लंबित मांगों के समर्थन में शुक्रवार को दूसरे दिन भी सदर अस्पताल से लेकर एपीएचसी तक ओपीडी कार्य बहिष्कार जारी रहा. जिसके कारण मरीजों को इलाज के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. हड़ताली चिकित्सकों की मांगों को जायज बताते हुए आयुष सिस्टम एसोसिएशन ऑफ बिहार एवं बिहार राज्य दंत चिकित्सक संघ ने भी अपना समर्थन दिया है. बिहार राज्य दंत चिकित्सक संघ ने कहा है कि भासा की मांगों में विशेष रूप से अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान, अनावश्यक प्रशासनिक पहल, बायोमेट्रिक से हाजिरी एवं गृह जिले के नजदीक पदस्थापन शामिल है. संघ ने भासा की मांग को जायज बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से इस मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की है.

ओपीडी में नहीं पहुंचे मरीज

डॉक्टरों के ओपीडी कार्य बहिष्कार के दूसरे दिन ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या नगण्य रही. कार्य बहिष्कार के कारण दूसरे दिन भी सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने सदर अस्पताल का जायजा लिया. सीएस ने ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को सदर अस्पताल के इमरजेंसी में चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने का निर्देश दिय. सीएस ने इमरजेंसी, एसएनसीयू, प्रसव कक्ष एवं भर्ती वार्डों का निरीक्षण कर मरीजों से फीडबैक लिया. चिकित्सकों के हड़ताल के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. भासा के जिला सचिव डॉ. कुणाल कौशल ने कहा कि भासा की बैठक में लिये गये निर्णय के आलोक में 27, 28 एवं 29 मार्च तक कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया है. इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने चिकित्सकों से कार्य बहिष्कार को वापस लेने का अनुरोध किया है. ताकि मरीजों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सके. सीएस ने कहा कि चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार के संबंध में उपसचिव स्वास्थ्य विभाग को पत्र देकर उचित मार्गदर्शन की मांग की है.

मांग पुरी नहीं होने पर उग्र होगा हड़ताल

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के जिला सचिव डॉ. कुणाल कौशल ने दर्जनों चिकित्सकों के हस्ताक्षर युक्त 6 सूत्री मांग का ज्ञापन डीएम अरविंद कुमार वर्मा को सौंपा है. चिकित्सकों की मांगों के संबंध में डा. कौशल ने कहा कि चिकित्सा सेवा एक आकस्मिक सेवा है. इस सेवा में काम करने वाले चिकित्सकों के कार्य अवधि का निर्णय अभी तक नहीं हो सका है. बायोमेट्रिक उपस्थिति की समय सीमा का पालन करने पर कई काम नहीं हो सकेगा. चिकित्सा जैसी आकस्मिक सेवा होने के बावजूद विभाग में पदाधिकारी एवं कर्मचारियों को आवासीय सुविधा अस्पताल परिसर में उपलब्ध नहीं है. जिसके कारण बायोमेट्रिक उपस्थिति के लिए समय सीमा का पालन करने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा. डॉ. कौशल ने कह कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति में कुछ दिन ही शेष बचा है. चिकित्सकों का वेतन रोक दिया गया है. जिला पदाधिकारी से वेतन निकासी की अनुमति देने की मांग की गई है.

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

डॉक्टर के कार्य बहिष्कार के कारण विधि व्यवस्था एवं अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने शुक्रवार को भी सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया. अस्पताल का निरीक्षण के दौरान कहा कि चिकित्सकों ने अपनी मांगों और बायोमैट्रिक अटेंडेंस के खिलाफ हड़ताल पर हैं. जिसके कारण ओपीडी सेवा बंद है. हालांकि इमरजेंसी सेवाएं चालू है. चिकित्सकों को कहा गया है कि अपनी हड़ताल समाप्त कर ओपीडी सेवा चालू कर मरीजों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें. अन्यथा चिकित्सकों पर विभागीय कार्रवाई भी हो सकती हैं. मौके पर भासा के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एसएन झा, सचिव डॉ. कुणाल कौशल, डॉ. रामनिवास सिंह, डॉ. संजीव कुमार झा, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. विनय कुमार, डॉ. मेराज अशरफ, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. श्रवन कुमार, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. राजकुमार पाठक, डॉ. विक्रम सिंह, डॉ. ज्वाला, डा. रागिनी कुमारी, डॉ. महारानी कुमारी सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित थे.

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