सदर अस्पताल में उपलब्ध नहीं है टेटवेक की सूई, बाजार में हो रही है कालाबाजारी

मुंगेर : सदर अस्पताल में टेटवेक का इंजेक्शन समाप्त हो चुका है. दूसरी ओर बाजार में भी टेटवेक के इंजेक्शन का काफी दिनों से शॉर्टेज चल रहा है. फलत: टीटवेक की सुई की कालाबाजारी हो रही है. इधर अस्पताल प्रशासन द्वारा अब तक इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है. इस परिस्थिति […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

मुंगेर : सदर अस्पताल में टेटवेक का इंजेक्शन समाप्त हो चुका है. दूसरी ओर बाजार में भी टेटवेक के इंजेक्शन का काफी दिनों से शॉर्टेज चल रहा है. फलत: टीटवेक की सुई की कालाबाजारी हो रही है. इधर अस्पताल प्रशासन द्वारा अब तक इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है.

इस परिस्थिति में आम लोग परेशान है. क्योंकि टिटवैक का इस्‍तेमाल किसी दुर्घटना में चोट लगने पर या फिर लोहे से जख्म होने पर ज्‍यादा होता है. यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. इसके अलावा गर्भवतियों व बच्चों को भी टिटवैक का टीका लगाया जाता है.
इंजेक्शन के अभाव में मरीजों को हो रही परेशानी: सदर अस्पताल में टिटवैक के इंजेक्शन का शॉर्टेज चल रहा है. खास कर आपातकालीन वार्ड में जब भी कोई जख्मी मरीज पहुंचता है तो चिकित्सक उनके परिजनों को बाजार से टिटवैक खरीद कर लाने को कहते हैं. जिसके बाद परिजनों को बाजार में काफी भटकने के बाद ब्लैक में टिटवैक का इंजेक्शन उपलब्ध हो पाता है.
कई मरीजों के परिजन तो परेशान होकर टिटवैक के इंजेक्शन को लगाने से ही मना कर देते हैं. वहीं दूसरी ओर इस इंजेक्शन के किल्लत से न तो गर्भवती महिलाओं को टीका लग पा रहा है और न ही बच्चों को. यही हाल रहा तो आने वाले समय में कई लोगों टिटनेस की परेशानी हो सकती है, जो कि कई बार जानलेवा साबित हो जाती है.
टिटवैक इंजेक्शन की क्यों है इतनी मांग: धातु से चोट लगने या जख्म होने पर आम तौर पर डॉक्टर टिटनेस के इंजेक्‍शन लगाने का परामर्श देते हैं. साथ ही महिलाओं को गर्भधारण के दौरान 3 व 7-8 माह व शिशुओं को 4 माह पर टिटनेस से बचाने के लिए यह इंजेक्शन लगता है. इससे मरीज को सेप्टीसीमिया होने का खतरा घट जाता है. डॉक्‍टरों के अनुसार घाव होने, गहरे रिसाव या जलने पर 24 घंटे में टिटनेस का इंजेक्शन लगाना सबसे जरूरी है. इसी कारण से टिटवैक के इंजेक्शन की इतनी मांग है.
किंतु पिछले दो दिनों से मरीज टिटवैक कं इंजेक्शन के लिए खासे परेशान नजर आ रहे हैं. चिकित्सकों की मानें तो टिटनेस का सीधा असर हमारे नर्वस सिस्टम पर पड़ता है. समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए तो ये बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है. गर्भावस्था में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में अगर मां को टिटनेस हो गया तो इसका सीधा असर बच्चे पर भी पड़ेगा. ऐसे में मां का सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है.
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि अस्पताल में ही नहीं बाजार में भी टिटवैक के इंजेक्शन का शॉर्टेज चल रहा है. इसके लिए बीएमआईसीएल को पत्र लिखा गया है. किंतु वहां से अब तक कोई जबाव नहीं मिला है. बीएमआईसीएल द्वारा ही इस मामले में कोई कारगर उपाय किया जा सकता है.
100 रुपये तक वसूल रहे कीमत
वैसे तो थोक बाजार में टिटनेस इंजेक्शन 6 रुपये का मिलता है, लेकिन रिटेलर 1 इंजेक्शन के 100 रुपये तक वसूल रहे हैं. कारण पूछने पर दुकानदार कहते हैं कि कंपनियों ने इस इंजेक्शन की सप्लाइ बंद कर दी है. उसके पास जो थोड़ा-बहुत बचा हुआ है वहीं मरीज को उपलब्ध हो पा रहा है.
एक दो दिनों में वह भी आउट ऑफ स्टॉक हो जायेगा. जिसके बाद 200 रुपये देने पर भी यह इंजेक्शन नहीं मिल पायेगा. सूत्रों की माने तो बीते साल टेटनेस की दवा को ड्रग प्राइस कंट्रोल के दायरे में लाया गया था. दवा कंपनियों को ताकीद की गई थी कि वे इस दवा को 5 रुपए से अधिक की कीमत पर नहीं बेच सकती है.
लेकिन कंपनियों का कहना था कि इसकी लागत ही 5 रुपये के आसपास बैठती है इसलिए वे इस बंदिश के बाद इसका उत्‍पादन नहीं कर पायेंगी. इसका उत्‍पादन करने पर उन्हें नुकसान होगा. इसलिए कई दवा उत्‍पादन कंपनियों ने इसे बनाना बंद कर दिया. मार्केट में सप्‍लाइ घटने का यह सबसे प्रमुख कारण है.
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