रोगियों को नहीं मिलती दवा

लापरवाही . हर साल लाखों की दवाइयां हो जाती हैं एक्सपायर जिले के सदर अस्पताल में रोगियों से दवा की कमी की बात कही जाती है लेकिन वस्तुस्थिति अलग है. यहां लाखों की दवा हर साल एक्सपायर हो जाती है व इसे फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है. मुंगेर : सदर अस्पताल […]

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लापरवाही . हर साल लाखों की दवाइयां हो जाती हैं एक्सपायर

जिले के सदर अस्पताल में रोगियों से दवा की कमी की बात कही जाती है लेकिन वस्तुस्थिति अलग है. यहां लाखों की दवा हर साल एक्सपायर हो जाती है व इसे फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है.
मुंगेर : सदर अस्पताल में हर साल लाखों की दवाइयां एक्सपायर हो जाती है़ं जिसे बाद में किसी झाड़ी में फेंक दिया जाता है या फिर उसे आग के हवाले कर दिया जाता है़ जबकि हकीकत यह है कि अस्पताल में प्राय: दवाओं की कमी बतायी जाती है़ं जिसके कारण मरीजों को अस्पताल में मिलने वाली कई प्रकार की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती है़ अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र के पीछले भाग में लाखों रुपये की एक्सपायर दवाइयां फेंकी गई है़ं
दवा काउंटर पर बताया कि खत्म हो गयी है दवा
पूरबसराय निवासी गोपाल यादव ने बताया कि वह शुक्रवार को सदर अस्पताल में अपना इलाज करवाने गये थे़ उन्हें पिछले दो- तीन दिनों से खांसी हो रही है. उन्हें देखने के बाद चिकित्सक ने पुरजे पर कफ सीरप लिख दिया़ किंतु जब दवा काउंटर पर गये तो उन्हें फर्मासिस्ट ने बताया कि कफ सीरप खत्म हो गया है, बाहर से खरीद लीजिए़ जिसके कारण उन्हें बाहर के दुकान से दवा खरीदनी पड़ी़
दर्जन भर एक्सपायरी दवा छुपा कर रखी गयी है
मरीजों को अस्पताल के दवा काउंटर से फर्मासिस्ट यह कह कर लौटा देता है कि दवा नहीं है़ं किंतु वही दवा कुछ दिन बाद एक्सपायर हो जाने पर सामने आने लगता हैं. पोषण पुनर्वास केंद्र के बाथरूम के समीप दर्जन भर अधिक प्रकार की एक्सपायरी दवाइयां छिपा कर रखा गया है़ जिसकी कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है़ं जिसमें मैग्नेशियम सल्फेट, अल्बेंडाजॉल ओरल, ओफोक्सा सिलीन, सिफोटेक्शीन, पारासीटामोल, कफ सीरप व बच्चों के विटामीन की दवाइयां शामिल है़ं साथ कई कार्टून डीएनएस स्लाइन भी हैं. इन दवाओं में कई तो पिछले साल ही एक्सपायर हो चुके हैं तथा कई इस साल जनवरी व फरवरी माह में एक्सपायर हुए हैं.
कहते हैं सिविल सर्जन
सीएस डॉ श्रीनाथ ने बताया कि पूर्व में पोषण पुनर्वास केंद्र एनजीओ द्वारा संचालित होता था तथा पिछले दो साल से यह केंद्र बंद पड़ा हुआ था़ उसी दौरान की दवाई एक्सपायर हुई होंगी़ एक्सपायर दवाओं की राशि एनजीओ के बकाये राशि से काटी जायेगी़
एक्सपायरी दवाएं
दवा का नाम एक्सपायरी डेट
पारासिटामोल फरवरी 2015
मैगनैशियम सल्फेट अक्टूबर 2015
अल्बेंडाजॉल ओरल अक्टूबर 2015
सिफोटेक्सीन इंजेक्शन जनवरी 2016
ओफोक्सा सिलिन फरवरी 2016
पहले भी जलायी जाती रही हैं दवाइयां
सदर अस्पताल में एक्सपायरी दवाओं का खेल काफी पुराना है़ यहां एक्सपायर हो जाने पर दवाओं को जला दिया जाता है, जबकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को वह दवा नसीब नहीं हो पाता. इसी साल फरवरी माह में अस्पताल उपाधीक्षक कार्यालय के ठीक सामने दिन में ही एक्सपायरी दवाओं में आग लगा दिया गया था़ जब दवाओं की शीशियां ब्लास्ट करने लगी तब कोतवाली थाना पुलिस भी काफी भागे-भागे पहुची थी. इसके पूर्व भी कई बार एक्सपायरी दवाओं को झारियों में फेंक कर हकीकत छिपाने की कोशिश की गयी थी़ इस बार फिर से भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाओं का अस्पताल के एक कोने से बरामद होना अस्पताल प्रबंधन की करतूत को दर्शा रहा है़
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