मुजफ्फरपुर : नालंदा में बस में आग लगने से सात लोगों की मौत के बाद राज्य परिवहन आयुक्त ने सवारी वाहनों की सख्ती से जांच करने का निर्देश दिया है. प्रदेश के सभी प्रमंडलीय आयुक्त, डीआइजी, डीएम, एसएसपी व एसपी को पत्र लिखा गया है. जांच में नियम का उल्लंघन करनेवाले संचालकों का परमिट रद्द करने की अनुशंसा साक्ष्य के साथ करें. नालंदा में हुई घटना इस बात को सिद्ध करती है कि परमिट शर्त का अनुपालन नहीं हो रहा है. ज्वलनशील पदार्थों का सवारी वाहनों में ढुलाई नहीं करना है. परिवहन नियम के अनुसार सवारी वाहनों के निरीक्षण का अधिकार पुलिस व परिवहन पदाधिकारियों को है.
आरटीए कार्यालय से करीब दो हजार बसों का परमिट निर्गत है. नयी बसों में तो अग्निमशन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स तथा इमरजेंसी डोर है. लेकिन कई ऐसी पुरानी बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं, जिनमें ये सभी सुविधाएं नहीं हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में जानेवाली बसों में देखा जाता है कि उसमें यात्री रसोई गैस व छोटे-छोटे गैस सिलिंडर की ढुलाई करते हैं.
इन बिंदुओं पर करनी है जांच
सवारी वाहन में इमरजेंसी गेट होना चाहिए
अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए
वाहन में ज्वलनशील पदार्थ की ढुलाई न हो
वाहन पर क्षमता से अधिक यात्री नहीं हों
परमिट में निर्धारित रूट पर ही वाहन चले
सवारी वाहन के चालक व कंडक्टर वरदी में रहें