तीन सदस्यीय कमेटी करेगी आरोपों की जांच

नगर आयुक्त पर अनियमितता का आरोप नगर आयुक्त पर आरोपों की जांच के लिए नगर विकास व आवास विभाग के निर्देश पर डीएम नी तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है. मुजफ्फरपुर : नगर आयुक्त रमेश रंजन प्रसाद की मुश्किलें बढ़ सकती है. नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश पर डीएम धर्मेंद्र सिंह ने उनके […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

नगर आयुक्त पर अनियमितता का आरोप

नगर आयुक्त पर आरोपों की जांच के लिए नगर विकास व आवास विभाग के निर्देश पर डीएम नी तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है.
मुजफ्फरपुर : नगर आयुक्त रमेश रंजन प्रसाद की मुश्किलें बढ़ सकती है. नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश पर डीएम धर्मेंद्र सिंह ने उनके खिलाफ तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है. इसमें डीडीसी अरविंद कुमार वर्मा, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी बच्चानंद सिंह व जिला परिवहन पदाधिकारी नजीर अहमद शामिल हैं.
उन पर मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के क्रियान्वयन, अभियंताओं व कर्मियों की नियुक्ति, सफाई कर्मियों के वेतन भुगतान, इलेक्ट्रॉनिक पोलों पर नंबर प्लेट लगाने, सुपर सकर मशीन की खरीद, एलइडी लाइट के क्रय सहित अन्य योजनाओं में अनियमितता का आरोप है. यह आरोप उप मेयर मान मर्दन शुक्ला ने लगाया है. अब इसको लेकर एक बार फिर नगर निगम में राजनीति गरमा गयी है.
उप मेयर ने मुख्यमंत्री व विभाग को लिखे पत्र में पूर्व मेयर समीर कुमार व पूर्व मेयर वर्षा सिंह के पति संजीव चौहान का भी जिक्र किया है. कहा गया है कि इन दोनों ने भी नगर आयुक्त के क्रियाकलापों की जांच की मांग की है. अपने पत्र के साथ उप मेयर ने अखबारों में छपी उस तसवीर की फोटोकॉपी भी भेजी है, जिसमें मेयर नगर आयुक्त जिला परिषद मार्केट में स्थित एक होटल से निकल रहे हैं. उनके साथ मेयर, अन्य पार्षद व नेता भी मौजूद हैं.
मानमर्दन शुक्ला
नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश पर डीएम ने किया गठन
डिप्टी मेयर ने लगाये हैं नगर आयुक्त पर गड़बड़ी के आरोप
बिना निविदा बिछायी जा रही पाइप लाइन
उप मेयर का आरोप है कि मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना में बिना निविदा के अलग-अलग वार्डों में पाइप लाइन बिछाई व मिनी पंप लगाया जा रहा है. इसमें उपयोग में लायी जानेवाली सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाये हैं. उनका कहना है योजना के तहत स्थल चयन में भी स्लम बस्तियों की अनदेखी की जा रही है.
संविदा पर बहाली में की गयी मनमानी
पूर्व नगर आयुक्त हिमांशु शर्मा की रिपोर्ट की अनदेखी करते हुए केके सिंह को संविदा पर रख कर जल कार्य अधीक्षक का प्रभार दे दिया गया. वहीं, अनियमितता में सहयोग नहीं करने पर संविदा पर ही बहाल कनीय अभियंता वेदानंद झा को काम में लापरवाही का हवाला देकर अचानक हटा दिया गया. इस मामले में वरीय प्रभार होने के बावजूद केके सिंह पर कार्रवाई नहीं हुई.
सुपर सकर व एलइडी लाइट खरीद में गड़बड़ी
सुपर सकर मशीन व एलइडी लाइट की खरीद में भी गड़बड़ी का आरोप लगा है. डिप्टी मेयर ने अपने पत्र में कहा है कि करोड़ों की लागत से सुपर सकर मशीन की खरीदारी हुई, जो पहली ही जांच में फेल हो गयी. अन्य नगर निगम की तुलना में खरीद पर करीब एक करोड़ अतिरिक्त खर्च किये गये. ऐसा ही एलइडी लाइट की खरीद में भी हुआ.
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