फेफड़े की बीमारी से एक साल में 15 कैदियों की मौत

मुजफ्फरपुर: शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में एक साल (2012-13) में 19 कैदियों की मौत हुई है. इनमें से अधिकतर कैदियों की मौत फेफड़े की बीमारी से हुई है. सेंट्रल जेल में जिन कैदियों की मौत फेफड़े की बीमारी से हुई है, उसमें 26 साल से लेकर 80 साल तक के कैदी शामिल हैं. इन […]

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मुजफ्फरपुर: शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में एक साल (2012-13) में 19 कैदियों की मौत हुई है. इनमें से अधिकतर कैदियों की मौत फेफड़े की बीमारी से हुई है. सेंट्रल जेल में जिन कैदियों की मौत फेफड़े की बीमारी से हुई है, उसमें 26 साल से लेकर 80 साल तक के कैदी शामिल हैं. इन सभी कैदियों को इलाज के लिये एसकेएमसीएच भरती कराया गया था. जहां इलाज के दौरान कैदियों की मौत हो गयी. जेल मुख्यालय को वर्ष 2012-13 में 19 कैदियों की मौत की रिपोर्ट भेजी गयी है. उसमें लिखा है कि 19 कैदियों में से 15 कैदियों की मौत फेफड़े की बीमारी से हुई है.

जेल मैनुअल के अनुसार जिन कैदियों की मौत सजा के दौरान हो जाती है. उसकी रिपोर्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी जाती हैं, लेकिन इन कैदियों की मरने की सूचना मानवाधिकार को नहीं दी गयी है. जेल प्रशासन ने लगातार जेल मैनुअल का उल्लंघन और मानवाधिकार का हनन किया है. अस्पताल में सामान्य कैदियों का ही इलाज हो पाता है. जेल में बने अस्पताल में फिलहाल एक डॉक्टर है. बुखार, पेट दर्द जैसे सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए कैदियों को इसमें भरती किया जाता है. लेकिन बीमारी के बढ़ने पर जेल प्रशासन कैदी को एसकेएमसीएच रेफर कर देता है.

यह है कारण
अधिक मात्र में धूम्रपान करने से लोग फेफड़े की बीमारी से ग्रसित होते हैं. धूल कण या फिर गंदे वातावरण में सांस लेने से तकलीफ होती है. शराब के अत्यधिक सेवन से भी यह बीमारी होती है. पौष्टिक भोजन नहीं मिलना भी फेफड़े की बीमारी उत्पन्न करते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते इसका इलाज नहीं कराया जाता है तो यह संक्रामक भी हो सकता है. इसके लक्षण खांसी, तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द है.

इन कैदियों की हुई मौत
गणोश राय, शंकर चौधरी, सिंधेश्वर सहनी, घनश्याम चौधरी, रामनाथ महतो, बृज नंदन महतो, जीवछ सहनी, टुनटुन ठाकुर, दुर्गा नंदन झा, बाबू नंद सदाम, बद्री यादव, बीरे लाल चौधरी, तेज नारायण सिंह, श्याम सदाय उर्फ दविया, रामेश्वर ठाकुर.

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