उल्लंघन: कोटपा से शहर के युवाओं को नहीं है कोई परवाह, कानून की फिक्र नहीं खुलेआम उड़ाते हैं धुआं

मुजफ्फरपुर : सिगरेट एंड टोबैको प्रोडक्ट (कोटपा) एक्ट 2003 भले ही देशभर में लागू है, लेकिन मुजफ्फरपुर में इसका पालन कराने की न तो किसी को फुर्सत है, न ही जिम्मेवार एजेंसियों को इसकी परवाह है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश भर में कोटपा के तहत अप्रैल 2016 से मार्च 17 […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
मुजफ्फरपुर : सिगरेट एंड टोबैको प्रोडक्ट (कोटपा) एक्ट 2003 भले ही देशभर में लागू है, लेकिन मुजफ्फरपुर में इसका पालन कराने की न तो किसी को फुर्सत है, न ही जिम्मेवार एजेंसियों को इसकी परवाह है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश भर में कोटपा के तहत अप्रैल 2016 से मार्च 17 के बीच सार्वजनिक स्थानों धूम्रपान करने वाले चार लाख से अधिक लोगों पर जुर्माना किया गया. वहीं जिले में 2016 में मात्र 139 लोगों से नौ हजार 535 रुपये वसूली की गयी. 2017 में जनवरी से जुलाई तक 43 लोगों से 5080 रुपये की वसूली की गयी है.
2014 में जारी हुए थे निर्देश : केंद्र सरकार ने पांच मई 2014 को देश के सभी राज्यों के डीजीपी को निर्देश जारी कर कोटपा के उल्लंघन को सीआरएम की सूची में जारी किया गया था. साथ ही इसकी रिपोर्ट तैयार कर साल में तीन बार केंद्रीय मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजने के निर्देश दिया था. लेकिन जिले में इस कानून को जैसे-तैसे बस नाम के लिए चलाया जा रहा है.
चालान काटने के समय पुलिस को झेलना पड़ता है विरोध : कोटपा कानून के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करनेवालों को फाइन करने के दौरान काफी विरोध का सामना करना पड़ता है. कहीं-कहीं तो पुलिस से नशेड़ियों की तीखी नोकझोंक भी हो जाती है. शहरी थाने के एक पुलिसकर्मी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि कोटपा कानून का चालान काटने के दौरान 80 प्रतिशत मामलों में नोकझोंक हो जाती है. जवान किसी तरह से मामले को मैनेज करते हैं. कभी-कभी चालान नहीं काटने पर फर्जी चालान खुद के जेब से पैसा भरना पड़ता है.
टीनएजर्स उड़ा रहे कानून की धज्जियां : जिले में कोटपा कानून को यूं तो हर वर्ग के लोग धज्जियां उड़ा रहे हैं. लेकिन इनमें सबसे ज्यादा टीनएजर्स शामिल है. पुलिस की माने तो युवा, अधेड़ व बुजुर्ग पुलिस की बात को अासानी से मान जाते हैं. उन्हें अगर फाइन किया तो जाता है, तो हल्के विरोध के बाद वे चालान कटवा लेते हैं. लेकिन समस्या तब खड़ी होती है, जब टीनएजर्स को चालान किया जाता है. तब वे बवाल खड़ा कर देते हैं. कोटपा कानून के जानकारों की माने तो जिले में 70 प्रतिशत टीनएजर्स कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं.
कोटपा के तहत अिभयान चलाने का निर्देश
जिले के सभी थानेदारों को कोटपा के तहत विशेष अिभयान चलाने का निर्देश दिया गया है. साथ ही इसे सख्ती से पालन करने की भी हिदायत दी गयी है.
विवेक कुमार, एसएसपी
क्या है कोटपा कानून
सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट (प्रोहिवेशन ऑफ एडवर्टाइजमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ ट्रेड एंड कॉमर्स, प्रोडक्शन, सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन)2003 को देशभर में समान रूप में तंबाकू से जुड़े सभी उत्पाद जैसे सिगरेट, सिगार, बीड़ी, गुटखा, पान मसाला, खैनी व स्नफ उत्पादों पर लागू किया गया था.
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