कार-बाइक ही नहीं, पैदल चलने वाले भी रेंगने को विवश

मुजफ्फरपुर : शहर की जान मोतीझील से आपको गुजरना है, तो जरा संभल जाइये. यहां की ट्रैफिक आपकी सारी प्लानिंग बिगाड़ सकती है. मोतीझील जाने के लिए हरिसभा चौक से सफर शुरू करेगें, तो हरेक मोड़ पर आपको जाम मिलेगा. रविवार को भी हरिसभा चौक से सफर शुरू किया, तो सामने वाहनों की लंबी कतार […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 20, 2017 10:21 AM
मुजफ्फरपुर : शहर की जान मोतीझील से आपको गुजरना है, तो जरा संभल जाइये. यहां की ट्रैफिक आपकी सारी प्लानिंग बिगाड़ सकती है. मोतीझील जाने के लिए हरिसभा चौक से सफर शुरू करेगें, तो हरेक मोड़ पर आपको जाम मिलेगा. रविवार को भी हरिसभा चौक से सफर शुरू किया, तो सामने वाहनों की लंबी कतार थी.
कार और रिक्शे के बीच से बाइक निकालते हुए आगे बढ़ने की कोशिश चंद कदम आगे जाकर बेकार साबित हुई. धीरे-धीरे रेंगते वाहनों के पीछे-पीछे चलते बड़ी मुश्किल से दीवान रोड तक पहुंचे तो और भी फजीहत. गली से निकलने वाले वाहनों के चलते कुछ देर रुकना पड़ा. फिर बढ़े तो कल्याणी चौक पर आड़े तिरछे खड़े वाहनों ने मुश्किल में डाल दिया.
मोतीझील की तरफ दूर-दूर तक कार, मोटरसाइकिल, रिक्शा और साइकिल की लंबी कतार थी. वाहनों के बीच से पैदल राहगीर बड़ी मुश्किल से जगह बनाकर आगे बढ़ रहे थे. चौराहे पर दो पुलिसकर्मी असहाय खड़े नजर आये. फिर भी जैसे-तैसे आगे बढ़े तो लगभग रेंगते हुए मोतीझील ब्रिज तक पहुंचे. तब तक आधा घंटा से अधिक समय बीत चुका था, जबकि हरिसभा चौक से मोतीझील की दूरी लगभग 900 मीटर है.
निक्की कुमारी, छात्रा : दिन में जाम की स्थिति इतनी खराब रहती है कि इधर से गुजरने का भी मन नहीं करता.
अंशू मिश्रा, व्यवसायी : जाम से निजात के लिए प्रशासन की ओर से इसका कोई ठोस इंतजाम नहीं किया जा सका है.
नेहा, गृहणी : शाम को जब फुर्सत मिलता है तो बाजार के लिए निकलते हैं, लेकिन जाम के चलते आने का मन नहीं करता.
स्नेह प्रभा, शिक्षक : प्रशासन
को भीड़ वाले क्षेत्र में ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिये ठोस कदम उठाना चाहिए, जिससे लोगों को राहत मिले.