25 करोड़ के ठेके के लिए विवि में खूनी संघर्ष !

मुजफ्फरपुर : बाबा भीमराव अंबेदकर बिहार विश्वविद्यालय में यूजीसी के माध्यम से रूसा से विकास के लिए मिले 25 करोड़ की राशि पर बड़े माफिया ठेकेदारों की नजर है. इस राशि से होनेवाले काम के ठेके पर वर्चस्व के लिए गैंगस्टर छात्रों को मोहरे के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. छात्रों के बीच गैंगवार […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
मुजफ्फरपुर : बाबा भीमराव अंबेदकर बिहार विश्वविद्यालय में यूजीसी के माध्यम से रूसा से विकास के लिए मिले 25 करोड़ की राशि पर बड़े माफिया ठेकेदारों की नजर है. इस राशि से होनेवाले काम के ठेके पर वर्चस्व के लिए गैंगस्टर छात्रों को मोहरे के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. छात्रों के बीच गैंगवार करा दहशत कायम करने की साजिश थी. इसी क्रम में ड्यूक व पीजी-3 छात्रावास के छात्रों के बीच गोलीबारी व बमबाजी की घटना हुई. चर्चा चंदे की है, लेकिन फसाद ही जड़ विकास के लिए विवि को मिले करोड़ों रुपये हैं.
पुलिस ने देर रात छापेमारी कर भारी मात्रा में हथियार व बम के साथ तीन युवकों को गिरफ्तार कर िलया. पुलिस इनके पास से बरामद मोबाइल के सहारे गैंगस्टर तक पहुंचने की कवायद में लगी है. बंदूक की नोक पर यहां ठेके पर कब्जा करनेवाले अनिल ओझा के चार वर्ष पूर्व फरार हो जाने के बाद अन्य गैंगस्टर यहां अपना वर्चस्व जमाने का प्रयास करने लगे. छात्र नेता शमीम हत्याकांड के आरोपित अनिल ओझा से परेशान विवि अधिकारियों व कर्मचारियों भी नये गैंगस्टर को मौन सहयोग शुरू कर दिया. इसी क्रम में सीपीडब्ल्यूडी में एकाधिकार जमाये गैंगस्टर का शागिर्द नीरज शर्मा यहां काफी सक्रिय हो गया. अगस्त 2015 में नैक मूल्यांकन के लिए पहुंची टीम के इर्द-गिर्द उसे राइफल-बंदूक से लैस गुर्गों के साथ मंडराते देखा गया था. इस दौरान नीरज व उसके समर्थक अन्य ठेकेदार गिरोह को धमकी देकर टेंडर नहीं डालने की चेतावनी दी थी.
वर्चस्व को लेकर यहां हो चुकी हैं कई हत्याएं
विश्वविद्यालय में वर्चस्व व रंगदारी का सूत्रपात बेगूसराय के छात्रों ने किया था. 60 के दशक में राजनीति शास्त्र की पढ़ाई करने आये बेगूसराय के जटाधारी सिंह व गीता सिंह ने यहां रंगदारी की नींव डाली थी. उस समय कॉलेज में हॉस्टल नहीं होने के कारण दोनों छाता चौक स्थित एसआरसी हॉस्टल में रहते थे. उनकी चाकूबाजी से भयाक्रांत न सिर्फ छात्र, बल्कि स्थानीय लोगों ने भी समर्पण कर दिया था. स्थानीय इंदुशेखर सिंह उनके प्रबल समर्थक थे. उनके बाद बेगूसराय के ही राहतपुर निवासी मिनी नरेश ने यहां अपना कब्जा जमा लिया. मिनी नरेश का भी यहां के हॉस्टल व ठेेकेदारी पर दबदबा था. लेकिन उसका विरोध भी यहां शुरू हो गया था. वर्ष 1978 से यहां हत्याओं का दौर शुरू हो गया.
वर्चस्व के लिए आका के इशारे पर हो रही गोलीबारी
इस साल अक्तूबर में यूजीसी ने 25 करोड़ में से 10 करोड़ रुपये विवि को भेज दिये. इस राशि से हॉस्टल व विवि के विभिन्न भवनों की मरम्मत का काम होना है. बताया जाता है कि यूजीसी ने मार्च 2018 तक कुल 25 करोड़ की राशि को खर्च कर लेने का निर्देश दिया है. इसको लेकर विवि प्रशासन टेंडर निकालने की कवायद कर रहा है. टेंडर को अपने पक्ष में करने के लिए एक बार फिर सक्रिय हुए माफिया यहां वर्चस्व स्थापित करने की साजिश रचने लगे. ड‍्यूक व पीजी छात्रावास के छात्रों को माफिया गिरोह अपने-अपने पक्ष में कर ठेके को हड़पने की साजिश में लग गये. एक-दूसरे पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए ही पिछले शनिवार को ड्यूक हॉस्टल के छात्रों ने पीजी-3 हॉस्टल पर जम कर गोलीबारी व बमबारी की थी. इसके बाद पीजी-3 हॉस्टल की ओर से जवाबी तैयारी शुरू हो गयी.
बिहार में पहली बार गरजी थी एके-47
विश्वविद्यालय पर वर्चस्व की लड़ाई में ही बिहार में पहली बार शहर के छाता चौक पर वर्ष 1990 में एके-47 गरजी थी. बेगूसराय के अशोक सम्राट ने छाता चौक निवासी चंदेश्वर सिंह की एके-47 से हत्या कर मिनी नरेश हत्याकांड का बदला लिया था.
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